दौसा

लालसोट . मोरेल बांध की पूर्वी नहर में छोड़ा पानी

नहर में पानी देख किसानों में दौड़ी खुशी की लहर

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Nov 21, 2021
लालसोट के मोरेल बांध की पूर्वी नहर से पानी छोडऩे के मौके पर मौजूद जल संसाधन विभाग के अभियंता।

दौसा. लालसोट उपखण्ड क्षेत्र की कांकरिया ग्राम पंचायत में मोरेल नदी पर बने मोरेल बांध की पूर्वी नहर में शनिवार को पानी छोड़ा गया। इससे पहले जल संसाधन विभाग के अभियंताओं ने बांध की मोरी के वॉल्व की पूजा की। इसके बाद वाल्व की चाबी को घुमा नहरों में पानी छोड़़ा।
नहरों में पानी का बहाव होता देख ग्रामीणों में किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर भी देखी
गई। इस दौरान बड़ी संख्या में कृषक महिलाएं भी मौजूद रही। कई किसान तो नहर से पानी अपने खेत तक पहुंचाने के प्रयासों में जुटे दिखाई दिए। इस मौके पर जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता एमएल मीना, भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री धर्मराज मीना, घूमसिंह मीना, रामस्वरूप मीना, मीठालाल दोसाडा, विनोद, राजेश बगड़ी कानलोदा, भरतलाल देवलदा, श्रीनारायण कोडयाई आदि मौजूद थे।

किसानों को अधिक पानी मिलने की उम्मीद
मोरेल बांध की मुख्य नहर से शनिवार को पानी छोड़ा गया है, जबकि शनिवार को बांध की दोनों नहरों से पानी छोड़ा जाना प्रस्तावित था। गौरतलब है कि गत दिनों में जल वितरण कमेटी व अधिकारियों के बीच हुई बैठक में बांध की मुख्य नहर व पूर्वी नहर में 20 नवम्बर को पानी छोडऩे का निर्णय किया गया था। सहायक अभियंता एमएल मीना ने बताया कि शुक्रवार को सवाई माधोपुर में मुख्य नहर से जुड़े गांवों में मावठ होने के बाद वहां किसानों को अभी पानी की जरुरत नहीं है। इसके चलते मुख्य नहर को नहीं खोला गया है। उन्होंने बताया कि मुख्य नहर को देरी से खोले जाने से पूर्वी नहर से जुड़े किसानों को इस बार अधिक पानी मिलने की उम्मीद है। पूर्वी नहर में एक सप्ताह तक पानी अधिक मिलेगा।

1952 में बना था मोरेल बांध
लालसोट उपखण्ड मुख्यालय से करीब 17 किमी की दूरी पर मोरेल बांध कांकरिया गांव के पास मोरेल नदी पर सन 1952 में बनाया गया था। मोरेल नदी बनास नदी की सहायक नदी है। मोरेल नदी सवाई माधोपुर जिले में मलारणा डूंगर रेलवे स्टेशन के पास बनास नदी में मिलती है।

करीब एक माह तक हो सकेगी सिंचाई
सहायक अभियंता ने बताया कि फिलहाल बांध का गेज 19 फीट छह इंच है। इसके चलते 1344 एमसीएफटी पानी उपलब्ध है। 211 एमसीएफटी पानी को डेड स्टोरेज के लिए छोड़कर शेष 1133 एमसीएफटी पानी किसानों को सिंचार्ई केे लिए उपलब्ध रहेगा। उन्होंने बताया कि इस बार बांध के पानी से करीब एक माह तक सिंचाई हो सकेगी और कमांड क्षेत्र के किसानों के लगभग 6500 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेंगी। गौरतलब है कि गत वर्ष भी करीब एक माह तक किसानों को नहरों के पानी से सिंचाई करने का मौका मिला था।

मोरेल बांध की फैक्ट फाइल
बांध का निर्माण- सन 1948 में शुरू
बांध का निर्माण कार्य पूरा- सन 1952
कुल भराव क्षमता- 30 फीट 5 इंच
बांध की नहरें- पूर्वी नहर व मुख्य नहर
बांध में पानी का फैलाव- करीब 10 किमी
नहरों की लंबाई- पूर्वी नहर (31.4 किमी) मुख्य नहर (28 किमी)
कितने जिलों में होगी सिचाई- दौसा व सवाई माधोपुर
बांध की माइनर नहरें - 29, (पूर्वी नहर माइनर 21.53 किमी) (मुख्य नहर माइनर 76.85 किमी)
कितने क्षेत्र में होगी सिंचाई- पूर्व नहर से 6705 हैक्टेयर भूमि, मुख्य नहर से 12 हजार 388 हैक्टेयर भूमि
कौन से गांवों में होगी सिंचाई- मुख्य नहर से बौंली व मलारणा डूंगर के 55 गांव और पूर्व नहर से लालसोट व बामनवास के 28 गांव शामिल हैं।

Published on:
21 Nov 2021 10:06 am
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