दौसा

थोक सब्जी में लौकी व भिंडी की दुर्गति, लागत भी नहीं निकलने से किसान मायूस

dausa एक रुपए किलों में भी नही मिल रहे है खरीदार

2 min read
Aug 21, 2021
लालसोट की थोक फल सब्जी में खरीदार की बाट जोहते आढ़तिए व किसान।

लालसोट. कभी मौसम की मार तो कभी बंपर पैदावार की मार धरती पुत्र यानि किसानों को झेलनी पड़ती है। लालसोट की थोक सब्जी मंडी में पिछले कई दिनों से कई सब्जियों की जबरदस्त आवक व खरीदारों की कमी से किसानों को उनकी लागत भी नहीं मिल रही है। औने-पौने दामों में भी खरीदार नहीं मिलने से इन सब्जियों की जमकर दुगर्ति हो रही है। जानकारी के अनुसार गत एक सप्ताह से गौरव पथ स्थित थोक फल सब्जी मंडी में लौकी, भिंडी, खीरा, टिंडा एवं बैंगन की आवक में काफी बढ़ोतरी हुई है, इनमे लौकी व भिंडी की तो बंपर आवक हो रही है, लेकिन अब इनके खरीददार भी गायब हो गए है। आलम यह है कि कुछ दिनों पूर्व तक थोक में 15 से 20 रुपए प्रति किलो के भाव से बिकने वाली लौकी इन दिनों एक रुपए किलो भीं नहीं बिक रही है। थोक मंडी में बीस किलों की वजनी लौकी की थैली को बीस रुपए में भी लेने के लिए कोई ग्राहक नहीं है। यही हालात भिंडी की भी हो रही है। भिंडी अब दो से तीन रुपए किलों में भी नहीं बिक रही है। टिंडा व खीरा के दाम भी काफी कम लग रहे है। जहां गत दिनों तक थोक सब्जी में सुबह आठ नौ बजे तक अधिकांश सब्जियां बिक जाती थी, लेकिन अब दस बजे बाद भी लौकी, भिंडी समेत कई सब्जियां बिना बिकी रह जाती है।
लागत तो दूर, भाड़ा भी नहीं निकल रहा है
लालसोट की थोक सब्जी मंडी में प्रतिदिन आसपास के कई गांवों से सैकड़ों किसान अपनी सब्जियों को लेकर पहुंचते है, लेकिन मंंडी में लौकी, भिंडी व अन्य सब्जियों के दाम एक साथ गिरने से वे काफी मायूस है। रामपुरा गांव निवासी किसान छोटूलाल एवं डिडवाना गांव निवासी किसान राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इन दामों से उनकी लागत से दूर, सब्जियों को गांव से मंडी तक लाने का भाड़ा भी नहीं निकल रहा है। आढ़तियों की दुकान पर घंटों तक खरीदार नहीं आने के बाद वे इन्हे आढ़तिए के भरोसे ही छोड़कर अपने गांव चले जाते है। कई बार गोशाला के लिए सब्जियां भेजनी पड़ती है।

बड़ी मंडियों में भी नहीं है डिमांड
थोक फल सब्जी मंडी के अध्यक्ष फूलाराम सैनी ने बताया कि गत दिनों बारिश का दौर थमने के बाद तापमान में हुई बढ़ोतरी के चलते सब्जियों की पैदावर भी एक साथ बढ़ी है। बड़े खरीददारों की भी डिमांड नही आ रही है, शादी विवाह का सीजन भी नहीं है। इन सबके चलते यह हालात बने हैं। किसान लाखों रुपए लगाकर बाड़ी लगाते है, लेकिन उन्हें लागत भी नहीं निकलने से वे निराश हंै।

खेरुज मंडी में वसूले जा रहे पांच गुना अधिक दाम
थोक फल सब्जी मंडी में सब्जियों के दाम काफी कम होने के बाद भी खेरुज मंडी में पांच गुना से अधिक दाम वसूले जा रहे हंै। थोक मंडी में एक रुपए किलो से बिक रही लौकी को खेरुज मंडी में पांच से दस रुपए किलो तक तथा भिंडी को दस रुपए किलो के भाव से बेची जा रही है। खीरे को दस से बीस रुपए किलो के भावों से बेचा जा रहा है।

Published on:
21 Aug 2021 10:03 am
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