गत वर्ष की तुलना में 33.91 प्रतिशत की कमी : जिले की औसत वर्षा से भी 25 प्रतिशत कम बरसा पानी
दौसा. जिले में इस बार मानसून कमजोर रहने से बांध, तालाब व एनिकट आदि खाली रह गए। जिले की औसत वर्षा में ही इस 25 फीसदी की बड़ी गिरावट हुई है। इससे सर्दी के मौसम के बाद आमजन को जलसंकट का सामना करना पड़ेगा। साथ ही रबी की फसलों की बुवाई के समय सिंचाई के लिए पानी का संकट भी खड़ा हो सकता है।
जल संसाधन विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून सीजन में दौसा जिले में औसत वर्षा 612.10 मिलीमीटर बारिश की जगह 455.76 एमएम पानी ही बरसा है। यह औसत वर्षा का 74.46 प्रतिशत है। जबकि गत वर्ष 663.35 एमएम बारिश हुई थी जो कुल 108.37 प्रतिशत था। गत वर्ष की तुलना में इस बार इन्द्रदेव की मेहरबानी 33.91 प्रतिशत कम रही है। वहीं जिले के मात्र पांच बाधों में ही पानी शेष रहा है। इनमें मोरेल डेम में 17.4 फीट, सैंथल सागर 10.4, सिनोली 2.8, माधोसागर 4.6 व चांदराना में 2.9 फीट ही पानी भराव है। जल संसाधन विभाग के 13 तथा पंचायत राज विभाग के अधीन 21 बांध खाली पड़े हैं। जिले के बांधों में भराव क्षमता का मात्र 18.78 प्रतिशत पानी मानसून के पूरा होने पर उपलब्ध हो पाया है। जबकि 2019 में मानसून के पूरा होने के बाद 10 बांधों में पानी भरा हुआ था।
अधूरे रह गए खरीफ फसल के बुवाई के लक्ष्य
जिले में कमजोर मानसून से फसलों की बुवाई का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। जिन इलाकों में बारिश कम हुई, वहां खेत खाली रह गए। ऐसे में कोरोना लॉकडाउन के बाद खेती की ओर लोगों का रुझान बढऩे की संभावना धूमिल हो गई। जिले में ज्वार को छोड़कर अन्य किसी फसल की लक्ष्य के मुताबिक बुवाई बुवाई पूरी नहीं हो सकी।
जिले में कृषि विभाग ने 1 लाख 93 हजार हैक्टेयर में खरीफ फसल की बुवाई का लक्ष्य तय किया था। इसमें से 1 लाख 82 हजार 903 हैक्टेयर में ही बुवाई हुई है। पचवारा इलाके में इस बार मूंगफली व तिल की बुवाई भी पूरी नहीं हो सकी। हालांकि नांगल, लवाण व सिकराय आदि इलाके में बाजरा की बुवाई अच्छी हुई, लेकिन दौसा, लालसोट व रामगढ़ पचवारा तहसील क्षेत्र में बुवाई कम रह गई।
लालसोट व दौसा उपखण्ड सर्वाधिक पीछे
मानसून में इस बार लालसोट व दौसा उपखण्ड सबसे पीछे रह गए। लालसोट में तो गत वर्ष की तुलना में 298 एमएम बारिश कम हुई है। राहुवास व रामगढ़ पचवारा इलाके का भी यही हाल रहा। इसी तरह दौसा में 359 एमएम बारिश कम हुई। नांगल, लवाण, सिकराय, बसवा आदि इलाके भी कमजोर मानसून का शिकार हुए। मात्र महुवा व बांदीकुई में औसत बारिश हो सकी है।