Internal Assessment Of First year College Students : दौसा। कॉलेजों में अब बोर्ड परीक्षा के सत्रांक अंकों की तरह आंतरिक मूल्यांकन होगा और इसके अंक मूल अंक तालिका में जुड़ेंगे। फर्क इतना है कि बोर्ड परीक्षा में सत्रांक तो जुड़ते हैं, लेकिन सत्रांक व मूल परीक्षा में अलग-अलग पास होना जरूरी नहीं होता, जबकि कॉलेज के आंतरिक व एग्जाम दोनों में पास होना जरूरी है।
Internal Assessment Of First year College Students : दौसा। कॉलेजों में अब बोर्ड परीक्षा के सत्रांक अंकों की तरह आंतरिक मूल्यांकन होगा और इसके अंक मूल अंक तालिका में जुड़ेंगे। फर्क इतना है कि बोर्ड परीक्षा (Board Exam) में सत्रांक तो जुड़ते हैं, लेकिन सत्रांक व मूल परीक्षा में अलग-अलग पास होना जरूरी नहीं होता, जबकि कॉलेज के आंतरिक व एग्जाम दोनों में पास होना जरूरी है। सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों के रेगुलर स्टूडेंट्स अब पढ़ाई से मन नहीं चुरा सकेंगे और न ही क्लास से ज्यादा अनुपस्थित रह सकेंगे।
अब सेमेस्टर एग्जाम के साथ इंटरनल एग्जाम भी करवाने के निर्देश प्राप्त हुए हैं। छात्रों को रेगुलर क्लास ज्वॉइन करने के साथ संबंधित सब्जेक्ट टीचर के बराबर संपर्क में रहना होगा, स्नातक प्रथम वर्ष में इसी सत्र से आंतरिक मूल्यांकन भी होंगे, जिसमें पास होना भी जरूरी होगा। ये मूल्यांकन संबंधित कॉलेज के पढ़ाने वाले शिक्षक ही करेंगे और मूल्यांकन के बाद ऑनलाइन आंतरिक मूल्यांकन के नंबर भेजेंगे।
मूल्यांकन का निर्धारण कॉलेज अपने स्तर पर करेंगे
आंतरिक मूल्यांकन का निर्धारण कॉलेज स्तर पर ही होगा। इसके तहत स्टूडेंट्स की उपस्थिति व अन्य सहशैक्षणिक गतिविधिकयों को शामिल करते हुए मूल्यांकन किया जाएगा। हालांकि कॉलेज चाहे तो अपने स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन के लिए स्टूडेंट्स का लिखित टेस्ट भी ले सकते हैं। कॉलेज में सेमेस्टर एग्जाम के साथ स्टूडेंट्स को इंटरनल एग्जाम में भी पास होना पड़ेगा। कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय ने इस संबंध में सभी कॉलेज के प्राचार्य को इंटरनल एग्जाम की तैयारी करने को कहा है।
स्टूडेंट की उपस्थिति, व्यवहार, खेल में भागीदारी के अंक होंगे
स्नातक प्रथम वर्ष में सेमेस्टर सिस्टम पूर्व में शुरू हो चुका है। इसके अलावा इंटरनल एग्जाम भी होंगे। यानी कोई पेपर 100 अंकों का है तो उसमें से 80 नंबर का सेमेस्टर तथा 20 का आंतरिक मूल्यांकन होगा। कॉलेज में पढऩे वाले स्टूडेंट्स का आंतरिक मूल्यांकन उनके अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन पर आधारित होता है। इसमें स्टूडेंट्स की उपस्थिति, उसके व्यवहार, विषय की समझ व खेल समेत अन्य क्रियाकालापों के 20 फीसदी अंक निर्धारित होंगे। दौसा के पंडित नवलकिशोर शर्मा पीजी कॉलेज में इसी तर्ज पर मिड टर्म परीक्षा ली गई है।
फिलहाल नियमित विद्यार्थियों के लिए
सेमेस्टर परीक्षा प्रणाली फिलहाल केवल स्नातक प्रथम वर्ष के नियमित विद्यार्थियों के लिए लागू की गई है। स्वयंपाठी विद्यार्थी वार्षिक परीक्षा ही देंगे। स्नातक द्वितीय और तृतीय वर्ष तथा स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों के लिए भी फिलहाल वार्षिक परीक्षा ही आयोजित की जाएगी।
इनका कहना है....
'मिड टर्म परीक्षा (Mid term exam) में टेस्ट पेपर के साथ-साथ उपस्थिति के भी अंक हैं। ऐसी स्थिति में छात्र-छात्राओं की यदि उपस्थिति कम रहती है तो उन्हें माक्र्स का नुकसान होगा। साथ ही जो विद्यार्थी 75 फीसदी से कम उपस्थित रहेंगे, उन्हें सेमेस्टर परीक्षा (Semester Exam) से भी वंचित कर दिया जाएगा। ऐसे में सभी विद्यार्थी नियमित रूप से कक्षाएं लें।'-श्रीमन रावत, प्राचार्य राजकीय पीजी कॉलेज, दौसा