-प्रशासन की ढिलाई से साल दर साल बढ़ रहे अधूरे आवास - दिए जा रहे हैं नोटिस, गले की फांस बने अधूरे आवास
दौसा. जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवासों में करीब छह सौ से अधिक आवासों का निर्माण अधूरा होने से जिला परिषद प्रशासन के लिए गले की फांस बने हुए हैं। प्रशासन की ढिलाई से अधूरे आवासों की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है। जिला परिषद द्वारा जिले में गरीब परिवारों को आवास की सुविधा देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास के लिए करीब डेढ़ लाख रुपए दिए जाते हैं।
इससे गरीब परिवार छोटा मकान बनाकर अपना जीवन गुजारा करता है। योजना के तहत जिला परिषद प्रशासन द्वारा स्वीकृत आवासों में पिछले दो साल में करीब छह सौ से अधिक आवास अधूरे हंै। इन अधूरे आवासों को पूरा कराने के लिए पंचायत समिति प्रशासन द्वारा लाभार्थियों को नोटिस देने के बाद पुलिस को साथ लेकर कार्रवाई के लिए कहा जा रहा है, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं करने से लाभार्थियों द्वारा अधूरे आवासों को पूरा नहीं किया जा रहा है। आखिर क्यों है अधूरे आवासयोजना के तहत सरकार द्वारा छोटे मकान बनाने के लिए गरीब परिवारों को करीब डेढ़ लाख रुपए तीन किस्तों पर दिए जाते हैं, लेकिन अधिकतर लाभार्थी छोटे मकान की जगह पर बड़ा मकान बना लेते हैं। इसके चलते सरकार की सहायता राशि कम पड़ जाने से आवास अधूरे रह जाते हैं।
इस तरह मिलता है लाभ
प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत होने पर पहली किस्त करीब 30 हजार लाभार्थी के बैंक खाते में डाल दी जाती है। इसके बाद दूसरी किस्ती मकान की नींव पूरी होने पर 48 हजार रुपए डाले जाते हैं। तीसरी किस्त मकान का निर्माण पूरा होने पर 42 हजार रुपए डाले जाते हैं। इसके अलावा मनरेगा के तहत एक आवास पर करीब 16 हजार पांच सौ रुपए मजदूरी के लाभार्थी को दिए जाते हैं।
कहां-कितने अधूरे आवास
जिला परिषद द्वारा मिली जानकारी के अनुसार पंचायत समिति लालसोट में 564 आवास अधूरे हैं। इसी प्रकार बांदीकुई में 4, दौसा में 2, महुवा में 14, सिकराय में 1 व लवाण पंचायत समिति में 38 आवास अधूरे हैं। जिले में सबसे अधिक लालसोट पंचायत समिति में अधूरे आवास हैं।
जल्द ही पूरे कराए जाएंगे अधूरे आवासों का निर्माण
जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अधूरे आवासों का निर्माण को जल्द ही पूरा कराया जाएगा। अधूरे आवास वाले लाभार्थियों पर ठोस कार्रवाई के प्रावधान नहीं है। लाभार्थियों को समझाकर ही आवासों का निर्माण पूरा कराया जाएगा।
लक्ष्मीकान्त बालोत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद दौसा