
Rajasthan Assembly Election 2023 विधानसभा चुनाव को लेकर जिले में भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। खासकर टिकटों पर आम मतदाता से लेकर सियासी दलों के कार्यकर्ताओं को इंतजार है। वहीं टिकट के दावेदारों ने अब पूरी ताकत झोंक दी है। कोई दिल्ली दौड़ रहा है तो कोई जयपुर जाकर अपने पक्ष में माहौल बनाने का काम कर रहा है।
जिले में पांच विधानसभा सीटों में से वर्तमान में दौसा, लालसोट, सिकराय व बांदीकुई कांग्रेस के पास हैं तथा महुवा सीट पर निर्दलीय विधायक है। कांग्रेस के समक्ष प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है तो भाजपा वापसी के लिए पूरा जोर लगा रही है। टिकट वितरण में विशेष सावधानी बरती जा रही है। राजनीतिक दलों की ओर से कराए गए सर्वे, पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट सहित अन्य कारणों को लेकर टिकट वितरण के कयास लगाए जा रहे हैं। जैसे-जैसे आचार संहिता लगने का समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे टिकट हथियाने के प्रयास भी बढ़ गए हैं।
स्थानीय व बाहरी का मुद्दा गरमाया
इस बार टिकट वितरण में स्थानीय व बाहरी का मुद्दा गरमाया हुआ है। बाहरी नेताओं के नामों की चर्चा सुनकर दौसा विधानसभा सीट के लिए भाजपा के स्थानीय दावेदार एकजुट होकर विरोध पर उतर आए हैं। सूत्रों के अनुसार सोमवार रात संगठन के समक्ष दावेदारों ने अपनी बात रखी। इसी तरह कांग्रेस में भी एक गुट स्थानीय के मुद्दे को हवा दे रहा है।
दलों में शामिल होने से हलचल
दौसा, बांदीकुई, महुवा व सिकराय सीट से जुड़े कुछ नेताओं के भाजपा के शामिल होने के बाद से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। बांदीकुई में तो एक धड़े ने आला नेताओं के समक्ष जाकर नाराजगी दर्ज कराई है। अभी जिले से कुछ और नेताओं के शामिल होने की संभावना को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।
आचार संहिता से पहले फीता काटने की होड़
इधर, जिले में विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लगने के डर से नेताओं में फीता काटने की होड़ मची हुई है। प्रतिदिन में 10-15 शिलान्यास व लोकार्पण किए जा रहे हैं। कई कार्यक्रमों में तो एक जगह ही 8-10 पट्टिकाओं का फीता काट दिया गया है।
रोचक यह है कि आमतौर पर श्राद्धपक्ष में नया काम शुरू नहीं किया जाता, लेकिन आचार संहिता का खौफ नेताओं में इतना है कि श्राद्धपक्ष में भी धड़ाधड़ उद्घाटन कर रहे हैं। कई जगह तो फीता काटने के बाद जीमण के कार्यक्रम भी हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव से पहले श्रेय लेने की होड़ में नेता जल्दबाजी कर रहे हैं।