दौसा

राजस्थान का रण: पांच साल बाद भी नहीं बदले हाल

https://www.patrika.com/rajasthan-news/
3 min read
Sep 23, 2018
road
राजस्थान का रण: पांच साल बाद भी नहीं बदले हाल

कुलदीप यादव. बांदीकुई

बूथ नंबर 210
मतदान केन्द्र
मोटूका, ग्राम पंचायत रलावता
2013 में कुल मतदान
1131
भाजपा को मिले वोट
1125
कांग्रेस को मिले वोट
2

बांदीकुई. ग्राम पंचायत रलावता के मोटूका गांव में जाने वाला मार्ग करीब 20 वर्ष पहले नाबार्ड योजना के तहत बना था। इसके बाद से सड़क की मरम्मत नहीं होने के कारण उखड़कर मिट्टी में तब्दील हो गई। जबकि इस गांव की आबादी करीब साढ़े 4 हजार है। इस गांव से कई गांवों का मार्ग जुड़ा हुआ है, लेकिन मार्ग पर जोगियों की ढाणी व मुख्य गांव में पानी निकास नहीं होने से काफी दूरी तक भराव हो रहा है।

यह पानी भराव अधिकांश समय रहता है। बारिश के दिनों में तो हालात इतने खराब हो जाते हैं कि वाहनों का निकलना तक मुश्किल हो जाता है। कई बार तो लोग गिरकर चोटिल तक हो चुके हैं। यह गांव भाजपा का गढ़ माना जाता हैं, लेकिन इसके बाद भी विकास को कोई गति नहीं मिली है।

गत विधानसभा चुनाव में इस गांव की जो स्थिति थी। वह जस की तस बनी हुई है। हालांकि 27 मई 2018 को सड़क का शिलान्यास विधायक डॉ. अलकासिंह गुर्जर ने किया, लेकिन शिलान्यास होने के चार माह बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। चरागाह एवं सिवायचक भूमि पर अतिक्रमण को मुक्त करने के मामले में प्रशासन आंखें मूंदकर बैठा है।


शिम्भूसिंह मोटूका ने बताया कि चार माह पहले सड़क का शिलान्यास तो कर दिया, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हुआ। ऐसे में आचार सहिता लग गई तो कार्य नहीं हो सकेगा।


जगदीशसिंह राजपूत ने बताया कि जोगियों की ढाणी के समीप रास्ते की स्थिति बदतर है। यहां तो चौपहिया वाहन निकालने पर ऊबड़-खाबड़ होने से नीचे तक छू जाता है। वोट के समय तो प्रत्याशी वादे कर जाते हैं, लेकिन बाद में अनदेखी के चलते लोग परेशान होते हैं।


मतदान केन्द्र
बास बिवाई, ग्राम पंचायत बिवाई
2013 में कुल मतदान
1006
कांग्रेस को मिले वोट
805
भाजपा को मिले वोट
6


बांदीकुई विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत बिवाई के मतदान केन्द्र बास बिवाई में प्रमुख समस्या पानी की है। यहां पानी की तीन टंकियां बनी हुई हैं, लेकिन नलकूपों के खराब पड़े होने से तीनों टंकियां सूखी पड़ी हैं। ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण कृषि एवं पशुपालन मुख्य व्यवसाय है। पानी के अभाव में मवेशियों को बेचना तक शुरू कर दिया है। कण्ठ तर करने के लिए निजी नलकूपों से पानी खरीदकर प्यास बुझानी पड़ रही है। एक नलकूप में लम्बे समय से मोटर खराब पड़ी है, कोई सुनने वाला नहीं है।

यहां प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मांग्या सिद्ध बाबा का स्थान है, लेकिन वहां भी सुविधाओं की कमी अखर रही है। सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही है। लघु उद्योग भी विकसित नहीं हुए हैं। इससे विकास की दौड़ में पिछड़ते जा रहे हैं। मतदान के लिए भी जागरूक रहते हैं, लेकिन चुनाव आते ही प्रत्याशी झूठे वादे कर वोट लेकर चले जाते हैं। इसके बाद क्षेत्र में आकर देखते तक नहीं है।


हरीशचंद सैनी ने बताया कि गांव में नालियों का निर्माण तक नहीं हुआ है। घरों का गंदा पानी आम रास्तों में भराव हो रहा है। साफ-सफाई की कोई समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण गंदगी बिखरी रहती है। यहां कांग्रेस को अधिक मत मिलने से क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि भी अनदेखी करते आ रहे हैं।


कमलेश कुमार शर्मा ने बताया कि जलदाय विभाग की ओर से गांव में पानी सप्लाई के लिए नलकूपों का निर्माण कराकर पानी की टंकियां बनाई गई, लेकिन गत पांच साल से टंकियों से एक बूंद पानी भी नहीं टपका है। गांव के लोग कई बार विधायक व जलदाय विभाग अधिकारियों से मिले, लेकिन समस्या Óयों की त्यों बनी हुई है। आखिर पीड़ा बताएं किसे। जब कोई सुनता ही नहीं।

Published on:
23 Sept 2018 08:12 am