Stone pelt for land acquisition for expressway construction: किसानों को फसल काटने के लिए 10 दिन की मोहलत देकर प्रशासन लौट गया
दुब्बी. कोलवा थाना क्षेत्र के धनावड़ गांव में दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए कंपनी को जमीन का कब्जे दिलवाने पहुंचे पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से शुक्रवार को ग्रामीणों की जमकर झड़प हुई। फसल को जबरन नष्ट करने व एक ग्रामीण के घायल होने पर लोगों ने पथराव भी कर दिया। पुलिस ने लाठी फटकार कर ग्रामीणों को तितर-बितर किया। बाद में किसानों को फसल काटने के लिए 10 दिन की मोहलत देकर प्रशासन लौट गया।
Stone pelt for land acquisition for expressway construction
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे के निर्माण कार्य में बाधा बन रही खड़ी फसल पर बुलडोजर चलाने की सूचना पर महिलाओं ने पेड़ पर फंदा लगाकर आत्महत्या करने का प्रतीकात्मक विरोध-प्रदर्शन किया। इससे प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। महिलाओं ने बताया कि अगर हमारी खड़ी फसल नष्ट की जाएगी तो हमारा घर कैसे चलेगा। किसानों ने बताया कि कड़ी मेहनत कर फसल को तैयार किया गया है। कंपनी से फसल काटने के लिए एक माह की मोहलत मांग रहे हैं, लेकिन कोई सुन नहीं रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि कई किसानों को तो अभी मुआवजा भी नहीं मिल रहा। ऐसे में प्रशासन मनमर्जी कर खड़ी फसल को बर्बाद कर भूमि कब्जे में लेने पर आमादा है।
इसी बीच मशीन चलाकर भूमि खाली कराने का प्रयास किया गया तो हंगामा हो गया। मशीन की चपेट में आने से गंगाराम मीणा निवासी ढीगारिया टप्पा घायल हो गया। दौसा अस्पताल से उसे जयपुर रैफर कर दिया गया। इस पर पुलिस-प्रशासन व ग्रामीण आमने-सामने हो गए व पथराव हो गया। हालांकि अधिकतर जमा मिट्टी के ढेले फेंके गए। पुलिस ने लाठी फटकार कर ग्रामीणों को दूर किया। ग्रामीणों ने राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को भी मामले से अवगत कराया, क्योंकि पूर्व में सांसद के नेतृत्व में पेड़ चिपको आंदोलन किया गया था। तब मुआवजे मिले बिना पाइप लाइन, बोरिंग, फसल आदि को नष्ट नहीं करने के लिए समझौता किया था। सांसद ने कहा कि किसी भी सूरत में अन्याय नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने सवाल खड़ा किया कि जब तक पूरा मुआवजा नहीं दिया जाएगा तो भूमि पर कब्जा कैसे लिया जा सकता।
मौके पर बांदीकुई उपखण्ड अधिकारी नीरज मीना, सीओ संजय चम्पावत , थाना अधिकारी बनवारीलाल व निर्माण कंपनी के अधिकारियों ने ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की। इस दौरान फसल को काटने के लिए 10 दिन का समय दिया गया। इसके बाद मामला शांत हुआ।
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