Major Action Against Doctors : सरकारी अस्पतालों से लापता चल रहे 71 डॉक्टरों की सेवाएं सरकार ने समाप्त कर दी हैं। इसके अलावा शासन ने इन डॉक्टरों की प्रैक्टिस पर भी रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। स्वास्थ्य सचिव के आदेश से संबंधित चिकित्सकों में हड़कंप मचा हुआ है।
Major Action Against Doctors : सरकारी अस्पतालों से लापता चल रहे 71 डॉक्टरों पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। बता दें कि उत्तराखंड के दूरस्थ इलाकों के सरकारी अस्पतालों की सेहत संवारने के मकसद से सरकार ने बांड पर कई डॉक्टर तैनात कर रखे हैं। उनमें से 71 बांडधारी डॉक्टर लंबे समय से अस्पतालों से लापता चल रहे हैं। बताया जाता है कि वह डॉक्टर निजी अस्पतालों में बड़े पैकेज लेकर काम में जुटे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे 71 डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर दी गई है। बॉन्ड के उल्लंघन पर उनके खिलाफ आरसी की कार्रवाई शुरू करने के साथ ही प्रेक्टिस पर रोक की तैयारी की जा रही है। सचिव स्वास्थ्य सचिन कुर्वे के मुताबिक बॉन्ड के तहत अस्पतालों में तैनात 71 डॉक्टरों के खिलाफ ड्यूटी से गायब होने की शिकायत मिली थी। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद डॉक्टरों की सेवा समाप्त कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही बॉन्ड राशि की वसूली के लिए आरसी काटने की कार्रवाई शुरू की जा रही है। इन डॉक्टरों को या तो बॉन्ड उल्लंघन की एवज में धनराशि जमा करनी होगी। या फिर प्रशासन की ओर से उनकी कुर्की की जाएगी।
उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हो चुकी हैं। राज्य के पर्वतीय इलाकों में अधिकांश अस्पतालों में मानकों के अनुरूप डॉक्टर या स्टाफ तैनात नहीं है। डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को एक से दूसरे अस्पताल में रेफर किया जाता है। कई मरीज समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण काल का ग्रास बन चुके हैं। दुर्गम क्षेत्रों में सड़क के अभाव के कारण मरीजों को कई मील पगडंडियां पार कर डोली के सहारे अस्पतालों तक पहुंचाया जाता है। दूरस्थ अस्पतालों में डॉक्टर सेवाएं देना नहीं चाहते हैं।
सरकार ने अस्पतालों में कड़ी शर्तों के साथ बांडधारी डॉक्टरों की तैनाती की थी। स्वास्थ्य सचिव के मुताबिक बॉन्ड डॉक्टर सेवा शर्तों का उल्लंघन न करे इसके लिए सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल को पत्र भेजकर बॉन्ड का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों की प्रैक्टिस पर रोक लगाने को लिखा जा रहा है। अस्पतालों से डॉक्टरों के गायब होने को गंभीरता से लिया जा रहा है और ऐसा करने वालों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।