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Uttrakhand : नाबालिग को बनाया दिया सरकारी शिक्षक, रिटायरमेंट से पहले खुली पोल, शिक्षा विभाग में हड़कंप

Action Against Teacher : 40 साल की नौकरी के बाद कम उम्र में शिक्षक बनने का राज खुलने से हड़कंप मचा हुआ है। सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके शिक्षक को अब बर्खास्त करने की तैयारी चल रही है। साथ ही तीन साल पहले उन्हें मिले प्रतिष्ठित अवॉर्ड को वापस लेने की कार्यवाही भी शुरू हो चुकी है।

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A case of employing a minor teacher in a government school in Uttarakhand has come to light

उत्तराखंड में नाबालिग को सरकारी शिक्षक बनाने का मामला सामने आया है

Action Against Teacher : 40 साल की नौकरी पूरी करने के बाद एक शिक्षक कम उम्र में भर्ती होने के पेंच में फंस गए हैं। प्राइमरी शिक्षक की उम्र भर्ती के समय 18 साल से कम थी, यह राज तब खुला जबकि आरोपी 40 साल की सेवा पूरी कर चुका था। खास बात ये है कि आरोपी शिक्षक को 2023 में प्रतिष्ठित शैलेश मटियानी पुरस्कार भी मिल चुका है। अब शिक्षक पर नौकरी और पुरस्कार वापसी के साथ वित्तीय वसूली का संकट मंडरा रहा है। ये मामला कोटद्वार के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, बालकनगर का है। यहां तैनात शिक्षक नफीस अहमद पर 40 वर्ष पहले नियम विरुद्ध तरीके से नौकरी पाने का आरोप लगा है। आरोप की विभागीय जांच होने पर पुष्टि हुई कि नियुक्ति के समय उनकी उम्र मानक से कम थी। मामले में जिला शिक्षा अधिकारी,पौड़ी ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कंचन देवराड़ी को रिपोर्ट भेज दी। देवराड़ी के मुताबिक शिक्षक की नियुक्ति अविभाजित यूपी के समय हुई थी। मामले में सभी कानूनी पहलुओं पर विधिक राय लेने के बाद कार्रवाई करेंगे। नफीस की दो वर्ष की सेवा शेष है और उन पर कार्रवाई की लटक रही है।

चार माह 19 दिन कम थी उम्र

कम उम्र में शिक्षक बनने वाले नफीस को बड़ा झटका लगा है। इस मामले में स्थानीय पार्षद विपिन डोबरियाल ने शिकायत दर्ज कराई कि नफीस अहमद की नियुक्ति 1985 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन नियमों के तहत हुई थी। इसमें शिक्षक बनने के लिए न्यूनतम आयु सीमा 18 वर्ष होना जरूरी था। विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि नियुक्ति के समय नफीस अहमद की उम्र 17 साल सात माह और 11 दिन थी। तकनीकी रूप से 18 साल पूरे होने में चार माह 19 दिन कम होने के बावजूद वह सरकारी शिक्षक बन गए।