Lunar Eclipse 2026 : आज लगने वाले चंद्रग्रहण पर एरीज के वैज्ञानिकों की पैनी नजर रहेगी। वैज्ञानिक इस ग्रहण पर शोध करेंगे। ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। आज चंद्रग्रहण के कारण अधिकांश इलाकों में कल रात ही होलिका दहन हो गया था।
Lunar Eclipse 2026 : आज लगने वाले चंद्रग्रहण पर आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान एवं शोध संस्थान (एरीज) के विज्ञानियों की पैनी नजर रहेगी। चंद्रग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और सायं 6:47 बजे चंद्रमा ग्रहण से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक भारत के अधिकांश हिस्सों में यह ग्रहण आंशिक रूप में दिखाई देगा, जबकि जापान, ऑस्ट्रेलिया, फिजी, अलास्का और चीन में पूर्ण चंद्रग्रहण देखा जा सकेगा। एरीज की इस खगोली घटना पर नजर रहेगी। वैज्ञानिक इस पर अध्ययन करेंगे। एरीज विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. वीरेंद्र यादव के मुताबिक भारत में पूर्ण चंद्रग्रहण असम, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल तथा अंडमान-निकोबार में कुछ ही मिनटों के लिए दिखाई देगा। इसके बाद इन क्षेत्रों में भी आंशिक ग्रहण नजर आएगा। चंद्रग्रहण के समय भारत में दोपहर होगी। लिहाजा देश में चंद्रमा के उदय के बाद ही ग्रहण दिखाई देगा। उत्तर-पूर्वी भारत में चंद्रमा अपेक्षाकृत जल्दी उदय होने से वहां ग्रहण अधिक समय तक देखा जा सकेगा। ग्रहण का पूर्ण चरण सायं 5:03 बजे शुरू होकर 5:33 बजे तक रहेगा। इसके बाद पृथ्वी की छाया धीरे-धीरे चंद्रमा से हटनी शुरू होगी और सायं 6:47 बजे चंद्रग्रहण समाप्त हो जाएगा।
चंद्रग्रहण से नौ घंटे पहले सूतककाल शुरू हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण से नौ घंटे पूर्व सुबह 6:15 बजे सूतक काल शुरू हो गया है। इस दौरान देश में मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे। सायं 6:47 बजे ग्रहा समाप्त होने के साथ ही सूतक काल भी समाप्त हो जाएगा। इसके बाद मंदिरों में दर्शन किए जा सकते हैं। उससे पहले मंदिरों में साफ-सफाई होगी।
चंद्रग्रहण भारत में दृष्य होगा। एरीज के वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार यह चंद्र ग्रहण भारत में पूर्ण रूप से दिखाई नहीं देगा और अधिकांश हिस्सों में आंशिक ग्रहण ही देखा जा सकेगा। डॉ. यादव के अनुसार ग्रहण के दौरान चंद्रमा का लाल रंग पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरने वाले सूर्यप्रकाश के कारण दिखाई देता है, लेकिन भारत में चंद्रोदय के समय पूर्ण ग्रहण का चरण समाप्त हो चुका होगा। इस खगोलीय घटना की जानकारी एरीज की ओर से आम जनता तक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पहुंचाई जा रही है।