देहरादून

अतिथि शिक्षकों की नौकरी पर संकट, वेतन कटौती की पहले से ही झेल रहे मार, जानें वजह

Job In Danger : सरकारी स्कूलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों की नौकरी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ये अतिथि शिक्षक पहले ही वेतन कटौती की मार झेल रहे थे। अब उनके सामने नौकरी का संकट पैदा हो गया है। इससे परेशान शिक्षक संगठन ने सरकार के सामने अपनी पीड़ा उठाई है।
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Mar 31, 2026
Jobs of guest teachers in Uttarakhand are at risk
उत्तराखंड में अतिथि शिक्षकों की नौकरी संकट में है

Job In Danger : सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के सामने अब नौकरी का संकट पैदा हो गया है। अतिथि शिक्षक दोहरे संकट में फंसे हैं। छुट्टियों में काम करने के बावजूद उनका वेतन काट दिया गया और अब शिक्षकों के प्रमोशन से नौकरी भी खतरे में आ गई है। बता दें कि उत्तराखंड शिक्षा विभाग में प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के 32 शिक्षकों को एलटी सहायक अध्यापक के पद पर प्रमोशन मिला है। नियमानुसार जैसे ही किसी पद पर स्थायी नियुक्ति या पदोन्नति होती है, वहां तैनात अतिथि शिक्षक की सेवा स्वतः समाप्त हो जाती है। इसके कारण गढ़वाल मंडल के 32 अतिथि शिक्षकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश धामी, महामंत्री राजपाल रावत और कोषाध्यक्ष रमेश रमेश रमोला ने देहरादून में विभागीय अधिकारियों के सामने भी यह समस्या उठाई है। वह शिक्षा मंत्री से भी मुलाकात करने का समय मांग रहे हैं, लेकिन मंत्री की बंगाल में व्यस्तता के कारण वह उनसे नहीं मिल पाए हैं। संघ ने सरकार से मांग की है कि वह अपनी घोषणा के अनुरूप इन पदों को यथावत रखे। साथ ही ऐसी स्थिति में प्रभावित अतिथि शिक्षकों को अन्यत्र रिक्त पदों पर समायोजित किया जाए।

वेतन कटौती से आर्थिक तंगी

उत्तराखंड में अतिथि शिक्षकों का आरोप है कि उन्होंने सर्दियों की छुट्टियों के दौरान भी स्कूलों में कार्य किया। इसके पुख्ता प्रमाण विभाग को सौंपे थे। इसके बावजूद, जनवरी के वेतन से छुट्टियों के दिनों के वेतन की कटौती कर दी गई। कहा कि इतने कम वेतन में छुट्टियों में भी काम करने के बावजूद वेतन कटौती करना न्यायोचित नहीं है। वेतन कटौती से वह बेहद आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का भी संकट पैदा हो गया है।

भविष्य की चिंता से बढ़ रहा तनाव

अतिथि शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि एक ओर आर्थिक तंगी है और दूसरी ओर नौकरी की कोई गारंटी नहीं है। सुरक्षित भविष्य न होने के कारण हजारों शिक्षक मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। शिक्षकों का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार ने उनके पदों को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाई, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ दिल्ली कूच

उत्तराखंड में बेसिक शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक चार अप्रैल को दिल्ली कूच करेंगे। उत्तराखंड से भी बड़ी संख्या में प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षक इसमें शामिल हों रहे हैं। प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के मंडलीय सचिव (गढ़वाल) सैन सिंह नेगी ने बताया कि 1 सितंबर 2025 को आए न्यायालय के फैसले से देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ उत्तराखंड के शिक्षक भी गहरे मानसिक तनाव में हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार पहल नहीं करती है तो पूरी शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतर जाएगी।

Updated on:
31 Mar 2026 07:09 pm
Published on:
31 Mar 2026 07:09 pm