देहरादून

घी की गुफा में साधनारत हुए महादेव शिव : अब एक माह बाद देंगे दर्शन, जानें इस परंपरा का महत्व

Unique Tradition : भगवान जागेश्वर बाबा घी से बनाई गई गुफा (घृत कमल) में साधनारत हो गए हैं। अब एक माह बाद यानी फाल्गुन एक गते को भगवान शिव गुफा से बाहर आएंगे। एक माह के लिए घृत कमल स्वरूप में भगवान शिव का पूजन किया जाएगा।

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Jan 14, 2026
उत्तराखंड के जागेश्वर धाम में आज महादेव शिव घृत कमल में विराजमान हुए।

Unique Tradition : भगवान शिव घी की गुफा (घृत कमल) में साधनारत हो गए हैं। ये अनूठी परंपरा उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित अष्टम ज्योतिर्लिंग श्री जागेश्वर मंदिर में सदियों से प्रचलित है। भीषण ठंड के चलते जब जागेश्वर क्षेत्र में नदी नाले जमने लगते हैं और चहुंओर पाले की चादर बिछने लगती है, तब माघ एक गते यानी मकर संक्रांति पर हर साल भगवान शिव एक माह के लिए घी की गुफा में साधनारत हो जाते हैं। आज सुबह जागेश्वर मंदिर प्रांगण में वेद मंत्रों के पाठ के साथ घृत कमल निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई। ज्योर्तिर्लिंग के मुख्य पुजारी पंडा हेमंत भट्ट उर्फ कैलाशानंद महाराज ने बताया कि आज मकर संक्रांति पर भगवान शिव के लिए घृत कमल तैयार किया गया। घृत कमल तैयार करने के लिए भक्तों और मंदिर समिति की ओर से 251 किलो शुद्ध गाय के घी की व्यवस्था कराई गई थी। स्वस्ति वाचन के साथ अग्नि प्रज्ज्वलित की गई और उसके बाद बड़े-बड़े बगौनों में घी का पिघलाकर शुद्ध करने की प्रक्रिया शुरू हुई। दोपहर बाद घृत कमल बनकर तैयार हुआ। उसके बाद ज्योर्तिलिंग बाबा को घी की गुफा के आवरण में ढक दिया गया। इससे समूचे इलाके का माहौल भक्तिमय बन गया। हजारों की संख्या में भक्तजन इस अनूठी परंपरा के साक्षी बने।

ऐसे तैयार हुई घी की गुफा

मकर संक्रांति पर भगवान शिव के लिए घी की गुफा तैयार करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।मंदिर समिति, श्रद्धालुओं और पुजारियों की ओर से घृत कमल के लिए दिए गए घी को मंदिर प्रांगण में एकत्र किया गया। उसके बाद घी को भगोनों में खौलाकर शुद्ध किया गया। उसके बाद खौलते घी को मंदिर स्थित जटागंगा में ठंडा किया गया। जटा गंगा का पानी इन दिनों बर्फ के समान ठंडा होता है। इसलिए जटागंगा के पानी में रखे गए भगौनों का घी आधे घंटे में जमकर ठोस बन जाता है। उसके बाद उस जमे और धुले हुए घी को घृत कमल का रूप दिया गया।

अब घृत कमल स्वरूप की होगी पूजा

 मकर संक्रांति पर आज घृत कमल के भीतर भगवान शिव को विराजमान किया गया। उसके बाद भगवान की विधिवत रूप  से पूजा अर्चना की गई। पुजारियों ने बताया कि अब फाल्गुन एक गते को भगवान शिव गुफा से बाहर आएंगे। तब तक घृत कमल स्वरूप में उनकी पूजा की जाएगी। भगवान शिव के इस स्वरूप के दर्शनों के लिए माघ माह में देश-विदेश से हजारों की संख्या में भक्तजन पहुंचेंगे। फाल्गुन एक गते को शिव घी के आवरण से बाहर आएंगे। उसके बाद उस घी को प्रसाद के रूप में भक्तों को वितरित  किया जाता है। लेकिन प्रसाद स्वरूप उस घी को खा नहीं सकते। केवल उसे शिरोधार्य किया जाता है।  

Updated on:
14 Jan 2026 04:53 pm
Published on:
14 Jan 2026 04:49 pm
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