Mohan Bhagwat's Latest Statement :आरएसएस सर संघचालक मोहन भागवत ने देश को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को इतना सशक्त बनाया जाए कि कोई भी हमें टैरिफ का डर न दिखा पाए। कहा कि जब राष्ट्र सुरक्षित और प्रतिष्ठित होता है, तो विश्व में भी हम सुरक्षित होते हैं। यदि हम मजबूत नहीं हैं, तो हम देश के भीतर भी सुरक्षित नहीं हैं।
Mohan Bhagwat's Latest Statement :आरएसएस के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में भाग लेने देहरादून पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संबोधन में राष्ट्र को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपने स्वदेशी सिस्टम को हमें मजबूत बनाना होगा। तभी हम विकसित राष्ट्र, विश्व गुरु बनेंगे। भागवत ने कहा कि आने वाले समय में विश्व का हर रास्ता भारत से ही होकर निकलेगा। स्वार्थ, भेदभाव से मुक्त होकर ही हम देश को सुरक्षित, प्रतिष्ठित बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि कि एक दौर में युगांडा से ईदी अमीन ने भारतीयों को भगा दिया था। आज हम विश्व भर में सुरक्षित हैं। कहा कि कमजोर को सभी दबाते हैं। विश्व भी सत्य को नहीं शक्ति को पहचानता है। उन्होंने कहा कि समाज की एकता, गुणवत्ता से ही देश का उत्थान हो सकता है। इसके लिए हमें भेद भुलाने होंगे। देश को मजबूत करने को आम जन में राष्ट्रभाव जागृत करना होगा।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश के भीतर भले ही हम लोग आपस में लड़ते हों। संसद में एक दूसरे के कपड़े फाड़े जाते हों, लेकिन जब बात देश की आती है, तो सभी एक हो जाते हैं। विश्व भर में मिल कर देश की समृद्धि, शक्ति, एकजुटता का प्रचार करते हैं। कहा कि संस्कार और तकनीक में समन्वय, अनुशासन बनाना जरूरी है। संस्कार, अनुशासन की कीमत पर तकनीक बेहतर नहीं है। इसे पाने को मानवीयता की बलि देना ठीक नहीं है। जेन जी पर कहा कि उनके सवालों का जवाब देने को जानकारी बढ़ानी होगी। उन्हें सही बात बताई जाए। आदर्श प्रस्तुत किया जाए।
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि जब तक समाज में भेदभाव है, तब तक आरक्षण जारी रहे। संविधान में आरक्षण के तय प्रावधानों का पालन हो। उन्होंने कहा कि सामाजिक चेतना का असर है कि जो लोग आरक्षण का लाभ लेकर संपन्न हो चुके हैं, वे अब खुद इसका लाभ छोड़ने लगे हैं।भागवत ने कहा कि जब तक सामाजिक विषमता है, तब तक भेदभाव है। शहरों में अलग तरीके से अस्पृश्यता के मामले देखे जाते हैं। गांवों में अलग अलग तरीके से भेदभाव की बात सामने आती है। स्वतंत्रता, समानता का सभी को अधिकार है। इस भेदभाव को सामाजिक समरसता से ही समाप्त किया जा सकता है। संघ इस दिशा में लगातार सक्रिय है। संघ में किसी की जाति नहीं पूछी जाती। कहा कि सामाजिक सद्भाव बने रहने तक इंतजार करना होगा। भेदभाव पूरी तरह समाप्त होने तक आरक्षण जारी रहे।