Porter Recruitment : भारतीय सेना की पोर्टर भर्ती से अब नेपाली पूरी तरह नदारद हो चुके हैं। उनकी जगह अब इस भर्ती में यूपी, बिहार और एमपी के युवाओं की भीड़ जमा हो रही है। बताया जा रहा है कि नेपाली युवा अब दुबई आर्मी और पुलिस भर्ती का रुख कर रहे हैं।
Porter Recruitment : नेपाली नागरिक अब भारतीय सेना की पोर्टर भर्ती से पूरी तरह गायब होने लगे हैं। बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध में नेपाली युवाओं को रूसी सेना में काम करने के तमाम अवसर मिले हैं। वहीं दूसरी ओर ब्रिटेन की सेना में भी नेपाली गोरखाओं की भर्ती जारी है। अग्निपथ योजना लागू होने के बाद नेपाली गोरखाओं का भारतीय सेना में भर्ती होने में दिलचस्पी भी कम होने लगी थी। इधर, अब एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से करीब 90 किमी दूर धारचूला में सोमवार से भारतीय सेना की पांच दिवसीय पोर्टर भर्ती शुरू हुई। पहले दिन नेपाल मूल का एक भी अभ्यर्थी शामिल नहीं हुआ। जबकि पूर्व में पोर्टर के लिए सेना धारचूला के स्थानीय युवाओं और नेपाली नागरिकों पर अधिक निर्भर रहती थी। स्थानीय जितेंद्र वर्मा, सोनू मर्तोलिया का कहना है कि अब नेपाली युवक पोर्टर बनने नहीं आ रहे हैं। उत्तराखंड के युवाओं की भागीदारी भी कम दिख रही है। पोर्टर भर्ती में अधिकांश युवा यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश के दिखाई दे रहे हैं।
भारतीय पोर्टर भर्ती में नेपाल और भूटान के युवा भी भाग ले सकते हैं। शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के साथ ही 18 से 40 वर्ष की आयु निर्धारित है। बता दें कि सेना में पोर्टरों की नियुक्ति छह माह के लिए अनुबंध पर होती है। पोर्टर का काम दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रसद एवं सामान पहुंचाना होता है। मानदेय 20 से 30 हजार रुपये मासिक है। इससे पहले पोर्टर भर्ती में अधिकांश नेपाली नागरिक ही हिस्सा लेते थे। अब इस भर्ती से नेपाली नागरिक एकदम नदारद हो गए हैं।
नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार रमेश चंद्र भट्ट के मुताबिक नेपाली युवा दुबई की आर्मी और पुलिस में जा रहे हैं। मलेशिया और कतर में नौकरी कर रहे हैं। स्वरोजगार करके पैसा कमा रहे हैं। ये ही वजह है कि नेपाली युवा अब सेना की पोर्टर भर्ती में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
पिछले कुछ समय से नेपाली नागरिकों की रोजगार के लिए भारत में निर्भरता कुछ कम हुई है। झूलाघाट बाजार के व्यापारी आलोक शर्मा बताते हैं कि रोजगार के लिए भारत पर नेपाली नागरिकों की निर्भरता कम हुई है। वर्तमान में प्रतिमाह औसतन 400 नेपाली नागरिक झूलाघाट से पिथौरागढ़ जिले में प्रवेश करते हैं। अधिकतर 35 साल से अधिक उम्र के होते हैं। दो साल पहले तक प्रतिमाह लगभग 600 लोग आते थे। बैतड़ी के दशरतचंद्र नगर पालिका के मेयर पुष्कर राज जोशी का कहना है कि नेपाल में रोजगार के अवसर बढ़े हैं।