प्रदेश में वर्तमान में जारी चारधाम यात्रा में धार्मिक पर्यटकों की तादाद आशानुरुप नहीं बढी है। इसलिए सरकार ने भविष्य में चारधाम यात्रा को और ज्यादा सुगम बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।
अमरनाथ सिंह की रिपोर्ट...
(देहरादून): प्रदेश में वर्तमान में जारी चारधाम यात्रा में धार्मिक पर्यटकों की तादाद आशानुरुप नहीं बढी है। इसलिए भविष्य में चारधाम यात्रा को और ज्यादा सुगम बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि इसमें अभी कुछ वक्त जरूर लगेगा लेकिन तीर्थयात्रियों के लिए यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण हो जाएगी। प्रदेश सरकार केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की सलाह पर पर्यटन से जुड़े पांच सदस्यीय विशेषज्ञों की एक कमेटी का गठन भी जल्द ही करेगी। दरअसल केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय का ध्यान सभी पर्वतीय राज्यों पर है।
केंद्र करेगा फंडिंग
केंद्र की मंशा पर्वतीय राज्यों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है। इस क्रम में ही उत्तराखंड में चारधाम यात्रा पर केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय का ध्यान है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र राज्य सरकार को फंडिंग भी करेगा। इसके लिए एक मास्टर प्लान भी बनाया जाएगा। इसके पहले पर्यटन से जुड़े विशेषज्ञ बद्रीनाथ,केदारनाथ,गंगोत्री और यमुनोत्री क्षेत्र की सडक़ों और पैदल मार्गों से यात्रा करेंगे। इनका मूल मकसद एक ही है कि किस तरह से उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। तीर्थयात्रियों को किस तरह की सुविधाएं चाहिए। विशेष रूप से बरसात के मौसम या फिर भूस्खलन की वजह से यात्रा में रूकावटें आती है। इसके लिए और क्या बेहतर उपाय किए जा सकते हैं। इसी ध्येय के साथ विशेषज्ञ सभी धामों का भ्रमण कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
चारधाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए सरकार लेगी विशेषज्ञों की राय
केंद्र सरकार शुरू से ही चारधाम यात्रा को ज्यादा से ज्यादा व्यवस्थित और सुगम बनाने के मकसद से आल वेदर रोड का काम प्रदेश में शुरू कर चुकी है। इस बारे में पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर का मानना है कि समय के साथ चारधाम यात्रा काफी आसान हुई है। तीर्थयात्रियों को काफी सुविधाएं मिल रही हैं। केंद्र सरकार का फोकस भी चारधाम पर ही है। आल वेदर रोड के निर्माण का मकसद सभी धामों को एक दूसरे जोडऩा है। इसके अलावा सरकार विशेषज्ञों की राय भी लेगी और उनके सुझावों पर अमल करेगी ताकि चारधाम यात्रा और भी सुगम हो सके।