New System : चुनाव आयोग ने दूसरे राज्यों से आए मतदाताओं की एक बड़ी बाधा को खत्म कर दिया है। अब दूसरे राज्यों से आईं बहुएं भी आसानी से मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगीं। अब पुराने पते से नाम कटवाने की जटिल प्रक्रिया को खत्म कर दिया गया है।
New System : दूसरे राज्यों से आईं बहुएं अपने ससुराल में अब आसानी से वोट कर सकेंगी। शादी के बाद दूसरे राज्य से आई कई बहुएं ससुराल में मताधिकार के प्रयोग से वंचित रह जाती हैं। इसका कारण पुराने पते से नाम कटवाने और नए पते पर जुड़वाने की जटिल प्रक्रिया हुआ करती थी। अब चुनाव आयोग ने इस बाधा को खत्म कर दिया है। अब किसी भी बहूरानी को अपना वोट ट्रांसफर कराने के लिए मायके या पुराने राज्य जाने की जरूरत नहीं होगी। वोटर मैपिंग की नई प्रक्रिया असल में शिफ्टिंग का हिस्सा है। अब महिलाएं वोटर हेल्पलाइन ऐप पर केवल फॉर्म-8 भरकर या https://voters.eci.gov.in/ वेबसाइट पर जाकर अपने वर्तमान (ससुराल के) पते पर नाम जुड़वा सकती हैं। इस डिजिटल बदलाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जैसे ही नए पते पर नाम जुड़ने की प्रक्रिया पूरी होगी, सॉफ्टवेयर पुराने राज्य की मतदाता सूची से नाम हटाने की कार्यवाही खुद ही शुरू कर देगा। इससे संबंधित लोगों को काफी राहत मिलेगी।
पुराने पते वाली वोटर लिस्ट से नाम हटवाने की जटिल प्रक्रिया अब आसान कर दी गई है। इस प्रक्रिया को सर्विस न्यूज के तौर पर देखें तो बहुओं को आवेदन के समय ससुराल पक्ष का निवास प्रमाण- जैसे बिजली का बिल, पानी का बिल या राशन कार्ड, मैरिज सर्टिफिकेट या शादी का कार्ड सत्यापन के समय देना होगा। इसके अलावा पुराना वोटर आईडी कार्ड या उसका नंबर (ईपीआईसी नंबर) भी दिया जा सकता है। वर्तमान मतदाता सूची की प्री एसआईआर मैपिंग 15 फरवरी तक चलेगी। पहले चरण में प्रदेश के 75 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग की जा चुकी है।
चुनाव आयोग अब फर्जी और दोहरे रिकॉर्ड को पकड़ने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। सिस्टम में फोटो सिमिलर एंट्रीज (पीएसई) और डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्रीज (डीएसई) तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। पीएसई एक जैसी फोटो वाले रिकॉर्ड को पकड़ता है। वहीं, डीएसई नाम, उम्र और पिता, पति के नाम की समानता के आधार पर दोहरे रिकॉर्ड की पहचान करता है। यह सॉफ्टवेयर खुद ही ट्रैक कर लेता है कि यदि एक व्यक्ति के दो राज्यों में रिकॉर्ड हैं, तो उन्हें कैसे व्यवस्थित करना है।