New Initiative : स्कूलों में अब गर्मियों और सर्दियों की छुट्टियों में कटौती हो सकती है। शासन स्तर पर अवकाश व्यवस्था में बदलाव के लिए विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। सरकार की मंजूरी मिलते ही नई व्यवस्था लागू हो जाएगी।
New Initiative : राज्य के सभी स्कूलों के ढांचे में बदलाव की तैयारी चल रही है। स्कूलों का टाइम-टेबल बदलने के बाद अब सरकार छुट्टियों को कम करने की दिशा में काम कर रही है। बताया जा रहा है कि सरकार राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद-एससीईआरटी के ग्रीष्म और शीत कालीन अवकाश में कटौती के प्रस्ताव की गंभीरता से समीक्षा कर रही है। इसके तहत शिक्षकों को 11 दिन का उपार्जित अवकाश (ईएल) मिल सकता है। सचिव रविनाथ रमन के मुताबिक वर्तमान अवकाश व्यवस्था में संशोधन के सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। इसको वित्त विभाग को परामर्श के लिए भेजा गया था। वित्त विभाग ने कुछ आपत्तियां की थी, जिनका जवाब भी विस्तार से भेज दिया है। इधर, बताया जा रहा है कि वर्तमान में लागू 48 दिन के शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन अवकाश को घटाकर 32 दिन करने का प्रस्ताव है। शेष 16 दिन के एवज में शिक्षकों के लिए 10 दिन का उपार्जित अवकाश की सिफारिश की गई है।
उत्तराखंड में शिक्षकों अलावा अन्य सभी सरकारी विभागों में कर्मचारियों को सालाना 31 ईएल मिलते हैं। शिक्षकों को एक ईएल, तीन विशेष अवकाश मान्य हैं। शिक्षक कई वर्षों से गर्मी-सर्दी की छुट्टी के बजाए ईएल की मांग करते आ रहे हैं। इधर, राजकीय शिक्षक संघ ने भी सरकार के इस कवायद का स्वागत किया है। राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री रमेश पैन्यूली, पूर्व महामंत्री डॉ. सोहन सिंह माजिला और उपाध्यक्ष राजकुमार चौधरी ने कहा कि सरकार दीर्घकालीन अवकाश करते हुए ईएल की सुविधा देती है तो शिक्षक इसका पूरी तरह से स्वागत करेंगे।
उत्तराखंड के स्कूलों के लिए जारी किए गए नए टाइम-टेबल का शिक्षक पुरजोर विरोध कर रहे हैं। बता दें कि कुछ दिन पूर्व ही सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों के लिए नया टाइम-टेबल जारी किया है। नए टाइम-टेबल के अनुसार गर्मियों में राज्य के सभी स्कूल सुबह 7:45 बजे खुलने हैं। वहीं सर्दियों में सभी स्कूलों को खोलने की टाइमिंग सुबह 9:45 बजे रखी गई है। शिक्षकों का कहना है कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थित विषम है। यहां के बच्चे जंगल, नदी-नाले पार कर दुरूह रास्तों से स्कूल पहुंचते हैं। रास्तों में वन्य जीवों का खतरा भी है। ऐसे में स्कूल की नई टाइम-टेबल बच्चों की सुरक्षा को खतरा पैदा कर सकता है।