देहरादून

ठेकेदारों के अफसर दोस्तों से होगी 252 करोड़ की वसूली, सरकार ने की सिफारिश, हैरान कर देगा मामला

Strictness On Officers : सरकार ने ठेकेदारों के अफसर दोस्तों से 252 करोड़ रुपये की वसूली की सिफारिश की है। लोनिवि, सिंचाई और ग्रामीण निर्माण विभाग के ठेकेदारों के अफसर दोस्तों की जुगलबंदी के चलते सरकार को 252 करोड़ की रॉयल्टी का नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार ने जिम्मेदार अधिकारियों से इस राजस्व की भरपाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।

2 min read
Mar 11, 2026
उत्तराखंड में सरकार ने अफसरों से 252 करोड़ की वसूली की सिफारिश कर दी है

Strictness On Officers : ठेकेदारों के अफसर दोस्तों से सरकार करीब 252 करोड़ रुपये वसूलने जा रही है। कई अफसरों पर इसकी गाज गिर सकती है। गैरसैंण विधानसभा में मंगलवार को सरकार की ओर से महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट पेश की गई। मार्च 2022 की अवधि की इस रिपोर्ट में सरकारी विभागों और अधिकारियों की ओर से बरती जा रही कई लापरवाहियों का खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में लोनिवि, सिंचाई और ग्रामीण निर्माण विभाग की ओर से कराए जाने वाले कार्यों में उप खनिजों के उपयोग पर रायल्टी ठीक से नहीं वसूली जा रही है। नियमों के तहत पांच प्रतिशत की दर से रॉयल्टी वसूली जानी चाहिए थी। लेकिन अधिकारियों ने इसे सिर्फ एक प्रतिशत की दर से वसूला जिससे राज्य को 252 करोड़ का नुकसान पहुंचा है। इसे अफसर और ठेकेदारों के गठजोड़ के रूप में भी देखा जा रहा है। रिपोर्ट में सभी जिलों के डीएम और संबंधित विभागों के आला अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया गया है।

कुंभ के 219 करोड़ खर्च नहीं हो पाए

सीएजी ने पाया कि 2021 के कुंभ के लिए जारी की गई कुल 806 करोड़ की धनराशि में से मेला अधिकारी ने 586 करोड़ रुपए ही जारी किए जबकि 219 करोड़ रुपए जारी ही नहीं हो पाए। कुंभ में खर्च हुई 362 करोड़ की धनराशि में से 345 करोड़ की राशि विभिन्न कार्यों पर खर्च हुई। लेकिन प्रमाण पत्रों की जांच से पता चला कि उपयोगिता प्रमाण पत्र वास्तविक व्यय पर आधारित नहीं थे। इसे लेकर अब तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं।

कोरोना जांच में भी अनियमितताएं

महालेखा परीक्षक ने 2021 के हरिद्वार कुंभ में कोरोना से जुड़ी जांच में अनियमितता भी पाई है। हालांकि मेला अधिकारी स्वास्थ्य कार्यालय से कैग को कई दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो पाए जिस वजह से पूरे तथ्य सामने नहीं आ पाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके लिए हुए भुगतान में कई स्तर पर खामियां उजागर हुई। इसके साथ ही कैग ने मेला अस्पताल हरिद्वार के लिए खरीदी गई नौ करोड़ की एमआरआई मशीन की खरीद में विक्रता को अनुचित लाभ पहुंचाने का खुलासा किया है।

हजारों करोड़ निवेश से कमाई शून्य

कैग रिपोर्ट के  अनुसार राज्य सरकार ने प्रदेश के 32 सार्वजनिक उपक्रमों एवं 28 सरकारी कंपनियों पर कुल 8993 करोड़ का निवेश किया। करोड़ों के लोन लिए गए और सब्सिडी भी दी गई लेकिन दो निगमों को छोड़कर अन्य से सरकार को कोई लाभ अर्जित नहीं हो पाया। कैग ने राज्य की आर्थिकी के लिए इसे गलत मानते हुए व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई है। शहरी विकास विभाग में शहरी क्षेत्र विकास प्राधिकरण बाह्य सहायता प्राप्त परियोजना के तहत की गई सलाहकार की नियुक्ति पर कैग ने सवाल उठाए हैं।

Published on:
11 Mar 2026 08:49 am
Also Read
View All

अगली खबर