Protest Against Hike In Electricity Rates : बिजली दरों में 18.50 फीसदी की बढ़ोत्तरी के प्रस्ताव से किसान से लेकर उद्यमी तक परेशान हैं। विद्युत नियामक आयोग में हुई जनसुनवाई में इसका तीखा विरोध हुआ। किसान, उद्योग जगत समेत आम उपभोक्ताओं ने दो टूक कहा कि बिजली चोरी, मिस मैनेजमेंट का नुकसान आम जनता नहीं भुगतेगी। कहा कि बिजली का बढ़ता बिल बर्दाश्त से बाहर हो रहा है।
Protest Against Hike In Electricity Rates : बिजली दरों में लगातार हो रही बढ़ोत्तरी से लोग परेशान हैं। इसी बीच अब यूपीसीएल ने दरों में 18.50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव रखकर कटे पर मिर्च छिड़कने का काम किया है। शुक्रवार को विद्युत नियामक आयोग में इस प्रस्ताव पर सुनवाई हुई। सुनवाई में तमाम लोग पहुंचे थे। लोगों ने बिजली दरों में बढ़ोत्तरी का कड़ा विरोध किया। उत्तराखंड इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि लाइन लॉस का सबसे बड़ा नुकसान उद्योग जगत को भुगतना पड़ रहा है। इंडस्ट्री में सबसे कम लॉस होता है। राजस्व भी सबसे अधिक उद्योगों से ही मिल रहा है। इसके बावजूद महंगी बिजली का सबसे अधिक नुकसान उद्योगों को हो रहा है। सरकारी संपत्तियों से सरचार्ज नहीं वसूला जाता, वो नुकसान भी उद्योग उठा रहे हैं। उपभोक्ताओं ने कहा कि सालों से बिजली बिल न देने वालों के खिलाफ कार्रवाई के बजाय बिल ही खत्म कर दिया गया है। कहा कि 10763 करोड़ के कुल राजस्व में यूपीसीएल 10068 करोड़ वसूल नहीं पाता है। उसका भार जनता क्यों उठाए। इससे फार्मा इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान हो रहा है। नए उद्योग नहीं आ पा रहे हैं। आठ लाख लोग इस इंडस्ट्री से जुड़े हैं। रोजगार प्रभावित हो रहा है। ऐसे में बिजली बिल न बढ़े।
उपभोक्ताओं ने बिजली दरों में फिक्स चार्ज को पूरी तरह माफ किए जाने की मांग की। होटल, मशरूम, स्टील इंडस्ट्री ने भी खुद को सीजनल इंडस्ट्री घोषित करने की मांग की। होटल इंडस्ट्री से राहुल देव ने कहा कि ऑफ सीजन में भी पूरे फिक्सचार्ज का भुगतान करना पड़ता है। लगातार बिना रीडिंग के बिलों की समस्या बढ़ रही है। मनमानी रीडिंग भर कर बिल भेजे जा रहे हैं। फिक्स चार्ज एक बड़ी समस्या बन गई है। इसके गलत निर्धारण से नुकसान हो रहा है। उपभोक्ताओं ने पूरे मीटर सिस्टम का स्पेशल ऑडिट कराने की मांग की।
भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधियों ने किसानों को महंगी बिजली देने का विरोध किया। कहा कि जो हालात हैं, उसमें खून और गुर्दा बेचकर ही बिजली बिल चुकाना होगा। कहा कि किसान यदि पांच यूनिट बिजली चोरी कर ले, तो उनके घरों में आतंकवादी की तर्ज पर दबिश दी जाती है। फैक्ट्रियों की बिजली चोरी भी किसानों पर थोपी जाती है। हालात ये कर दिए हैं कि किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं।