
धमतरी. खनिज विभाग ने हाइवा चालकों को खुली छूट दे रखी है। एक पिटपास से रोजाना कई टन रेत की सप्लाई हो रही है। पिटपास में रेत की मात्रा भी नहीं लिखा जा रहा है। ओवरलोडिंग से सडक़ें तो खराब हो रही है, साथ ही शासन को मिलने वाली राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि रेत खदानों की संख्या 61 है। वर्तमान में परसुली, सारंगपुरी, परखंदा, अरौद, सिरसिदा, दरगहन, दोनर, बोरसी, सरगी, डाभा, नवीन जोरातराई, हरदी, चदसुर और अमलीडीह की खदान से रेत का उत्खनन हो रहा है। खनिज विभाग के सूत्रों की माने तो शासन ने हाइवा वाहनों का लोडिंग निर्धारित कर रखा है। 10 चक्का वाले हाइवा वाहन में १२ घन मीटर तक रेत की लोडिंग कर सप्लाई कर सकते हैं, लेकिन जिले में इसकी अनदेखी की जा रही है। पिटपास में वाहन में रेत की मात्रा में अंकित करना है, ताकि चेकिंग के दौरान परेशानी न हो।
लेकिन रेत खदानों में जारी पिटपास में मात्रा नहीं लिखा जा रहा है। इस कारण हाइवा चालक 20 से 25 घन मीटर तक रेत ढो रहे हैं।
पड़ रहा असर
हाइवा वाहनों में क्षमता से अधिक रेत ढोने से इसका असर सडक़ों पर भी पड़ रहा है। धमतरी से गुंडरदेही मार्ग को बने करीब पंाच साल हुआ है। इस मार्ग में सबसे अधिक ओवरलोडिंग हाइवा चलती है, जिसके कारण सडक़ अब पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। कोलियारी-देवपुर सडक़ में तो जगह-जगह गडढे उभर आए हैं।
रेत खदानों की लगातार मानिटरिंग की जा रही है। अब तक किसी ने ओवरलोडिंग रेत की सप्लाई होने की शिकायत नहीं की है।
हेमंत नायडू, अधिकारी खनिज विभाग