
धमतरी. जिले के शिक्षकों की कमी के चलते स्कूलों में छात्र-छात्रओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पालक समिति की ओर से स्कूलों में ताला जड़कर आंदोलन करने के बाद भी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो रही है। ऐसे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर पालकों की चिंता बढ़ गई है।
धमतरी जिले में 888 प्राथमिक, 445 माध्यमिक, 57 हाई और 111 शासकीय हायर सेकंडरी स्कूलें हैं। इनमें से अधिकांश में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। इन स्कूलों में महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने से नया शिक्षण सत्र शुरू होने के एक माह बाद भी आधार पाठ्यक्रम को पूरा नहीं कराया जा सका। एक जानकारी के अनुसार धमतरी जिले के माध्यमिक स्कूलों में शासन की ओर से विषयवार शिक्षकों के 1856 पद स्वीकृत है, जिसमें से 1576 शिक्षक कार्यरत है, जबकि 280 पद रिक्त है। इसके अलावा ई-संवर्ग की बात करें तो उच्चाधिकारियों से लेकर शिक्षकों के कुल 7696 पद स्वीकृत है। इसके एवज में 5915 पदों पर नियुक्ति की गई है। अभी भी इसमें 1781 पद रिक्त है। इसी तरह टी-सवर्ग में विभिन्न शिक्षकों के 3040 पद स्वीकृत है, जिसमें से 784 पद रिक्त है। यही वजह है कि नया शिक्षण सत्र शुरू होने के बाद भी सैकड़ों स्कूलों में विषयवार पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। पालक संतोष निर्मलकर, प्रीतम यादव, सुरेन्द्र दीवान, लोकेश ध्रुव ने बताया कि ग्राम भेलवाकूदा माध्यमिक शाला में शिक्षक नहीं होने से बच्चों को पढ़ाई करने में परेशानी हो रही है।
बच्चों का भविष्य हो रहा अंधकारमय
पत्रिका पड़ताल में पता चला है कि शासकीय प्राथमिक भिड़ावर में कुल बच्चों की दर्ज संख्या 82 है। यहां दो शिक्षक कार्यरत है, जबकि महत्वपूर्ण विषय के एक शिक्षक का पद रिक्त है। ग्रामीण लिलेश्वर मरकाम, घुरवाराम साहू ने बताया कि शिक्षक की मांग को लेकर जिला प्रशासन को कई बार ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन नतीजा सिफर रहा। इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
स्कूल में ताला जडऩे के बाद भी नहीं हुई शिक्षक की नियुक्ति
माध्यमिक शाला सिंगपुर में कुल बच्चों की दर्ज संख्या 146 है। यहां शिक्षक के पांच पद स्वीकृत है, जिसमें से 4 पद रिक्त है। ग्रामीणों ने जिला शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपकर शिक्षक की नियुक्ति की मांग की, लेकिन मांग पूरी नहीं हुई। इससे नाराज ग्रामीणों ने स्कूल में ताला जड़ दिया। आश्वासन के बाद भी अब तक शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। ऐसे में पालकों में रोष पनपने लगा है।
जिले के शासकीय स्कूलों में रिक्त पदों पर शिक्षकों की जरूरत के हिसाब से पदस्थापना की गई है। इस समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
- रजनी नेल्सन, डीईओ