
धमतरी के जगदीश मंदिर से जुड़ा अनोखा इतिहास (photo Patrika)
Rath Yatra 2026: छत्तीसगढ़ की धर्मनगरी धमतरी में आस्था और शिल्पकला का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। शहर के प्राचीन जगदीश मंदिर में विराजमान भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमाएं पिछले 107 वर्षों से जन-जन की आस्था का केंद्र बनी हुई हैं। ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, इन दिव्य प्रतिमाओं का निर्माण वर्ष 1918 में ओडिशा के प्रसिद्ध शिल्पी देवीप्रसाद चित्रकार और उनके भाई बालमुकुंद ने किया था। महानीम की शाखाओं से निर्मित इन प्रतिमाओं को आकार देने में करीब ढाई महीने का वक्त लगा था।
वर्तमान में शिल्पी परिवार की तीसरी और चौथी पीढ़ी (बिक्रम महाराणा और उनके पुत्र शिवाशीष) इस धरोहर के संरक्षण और नवकलेवर की परंपरा को बखूबी निभा रहे हैं। रथयात्रा समिति के अनुसार 8 जुलाई सुबह 10.30 बजे भगवान का सप्तनदियों के पवित्र जल, दूध और गंगाजल से महास्नान कराया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महास्नान के बाद प्रभु अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके चलते 11 जुलाई से चार दिनों तक भगवान का औषधीय उपचार और गुप्त अनुष्ठान चलेगा, जिस दौरान मंदिर के कपाट आम भक्तों के लिए बंद रहेंगे। आगामी 15 जुलाई को नेत्रोत्सव के दिन भगवान नए रूप (नवकलेवर) में भक्तों को दर्शन देंगे।
शहर के प्राचीन श्रीजगदीश मंदिर में महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा देवी को गंगा, यमुना, गोदावरी, महानदी, समुद्र समेत अन्य तीर्थों से लाए गए जल से महास्नान कराया गया। मंदिर के पुजारी ने विशेष मंत्रोच्चारण के साथ महाप्रभु को महास्नान कराया। इसके बाद महाप्रभु के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। इधर स्नान के बाद महाप्रभु जगन्नाथ समेत भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भी बीमार हो गए हैं।
रथयात्रा महापर्व को लेकर शहरवासियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। 8 जुलाई से रथयात्रा महापर्व की शुरूआत हो गई है। मठमंदिर चौक स्थित जगदीश मंदिर में विशेष अनुष्ठान का रस्म भी शुरू हो गया है। बुधवार को महाप्रभु जगन्नाथ को तीर्थों के जल में शुद्ध केशर, दूध, दही, पंचामृत, गुलाब की पंखुड़ी, जौ और कूर्पर मिलाकर महास्नान कराया गया। पुरोहित बालकृष्ण शर्मा ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए विशेष पूजा-अर्चना कराया। इस दौरान महाप्रभु को स्नान कराने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मंदिर के ट्रस्टी गोपाल शर्मा, श्याम अग्रवाल समेत अन्य श्रद्धालुओं को महाप्रभु जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ ही श्री सुदर्शन चक्र को स्नान कराकर शहरवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की गई।
परंपरा अनुरूप महास्नान के बाद महाप्रभु जगन्नाथ का स्वास्थ्य बिगड़ गया है इसलिए वे तीन दिन आराम करेंगे। उनके स्वास्थ्य में सुधार के लिए विशेष काढ़ा से उपचार किया जाएगा। 11 जुलाई से महाप्रभु को स्वस्थ रखने के लिए विशेष औषधि काढ़ा का भोग लगाया जाएगा। 14 जुलाई तक प्रतिदिन सुबह 7.30 बजे श्रद्धालुओं को इसका वितरण भी होगा। मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि 15 जुलाई को सुबह 9.30 बजे विशेष हवन-पूजन के बाद महाप्रभु की प्रतिमा की पुन: प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। इस अवसर पर ट्रस्टी डॅा. हीरा महावर, किरण गांधी, बिहारीलाल अग्रवाल, प्रीतेश गांधी, मदन मोहन खंडेलवाल, अजय अग्रवाल, लक्खूभाई भानुशाली, मुरलीधर, लक्ष्मीचंद बाहेती, अनिल मित्तल, मोहन अग्रवाल, श्याम अग्रवाल, दिलीपराज सोनी समेत श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
मंदिर के पुजारी पंडित बालकृष्ण शर्मा ने 1918 का एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। जब धमतरी के भक्त इन प्रतिमाओं को पुरी से ट्रेन द्वारा ला रहे थे, तब अभनपुर के पास एक अंग्रेज टीटीई ने प्रतिमाओं के बक्से पर लाठी मार दी थी। इसके तुरंत बाद ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतर गए, लेकिन भगवान का डिब्बा सुरक्षित रहा। चमत्कार देख अंग्रेज टीटीई ने न सिर्फ माफी मांगी, बल्कि खुद प्रतिमाओं को धमतरी तक छोडऩे आया।
Updated on:
09 Jul 2026 02:46 pm
Published on:
09 Jul 2026 02:44 pm
