माओवादी घटना छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की 9वीं बटालियन में आरक्षक के रूप में कार्यरत जवान की मौत हो गई।
धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में माओवादी घटना में जवान की मौत हो गई। छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की 9वीं बटालियन में आरक्षक के रूप में कार्यरत टिकेश्वर ध्रुव के गृहग्राम परेवाडीह में जब यह प्रतिनिधि पहुंचा, तो उसके घर के सामने ग्रामीणों की भीड़ लगी हुई थी।
अर्जुनी थाना प्रभारी उमेन्द्र टंडन उनके साथ चर्चा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि जवान का शव रायपुर आने के बाद यहां लाया जाएगा। सोमवार को दोपहर में पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम बिदाई दी जाएगी। एक कोने में खड़े उसके दोस्त हेमंत कुमार साहू, राजेश ध्रुव, भुनेश्वर साहू की आंखों में आंसू बह रहा था।
उन्होंने बताया कि टिकेश्वर काफी जिंदा दिल इंसान था। उसे बचपन से ही देश सेवा का जुनून था इसलिए उसने पुलिस की नौकरी ज्वाईन की। दोस्त गैंदलाल, राजेश्वर ध्रुव, कैलाश ने बताया कि दो महीने पहले वह जब छुट्टी में आया था, तो उन्होंने काफी मौज-मस्ती किया था। उसने वादा किया था कि गर्मी की छुट्टी में वह फिर लौटकर आएगा। आज जब उसकी शहादत की खबर मिली, तो यकीन नहीं हुआ।
पिता जहूर ध्रुव अपने युवा बेटे की मौत से काफी दुखी हैं। उसने बताया कि टिकेश्वर छोटा होने के कारण परिवार का सबसे लाडला था। उसके दो बड़े भाई होमश्वर भक्त और रोशन भी उसे बहुत प्यार करते थे। मां भंगवतीन बाई ध्रुव की आंख का तो वह तारा था। जिस दिन वह ड्यूटी में बाहर गया, उसका रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। किसी तरह समझाने-बुझाने के बाद ही वह उसे बाहर जाने के लिए तैयार हुई। आज जब बेटे की मौत की खबर सुनी, तो वह बेसुध हो गई। जब भी होश में आती है, तो कहती है मेरा लाल टिकेश्वर कब आएगा।
उल्लेखनीय है कि टिकेश्वर का जन्म 1982 में हुआ था। बचपन से ही पढ़ाई में काफी होशियार था। पीजी कालेज से बीए की पढ़ाई पूरी करने के दौरान ही उसकी पुलिस में नौकरी लग गई। उसके कंधे में जब वर्दी सजी, तो वह काफी खुश था। उसका कहना था कि बचपन से जो सपना देखा था वह पूरा हो गया। वह कहता था कि जिंदगी भर अपने तन से वर्दी को जुदा नहीं करेगा और उसकी यह बात सच भी हो गई।
जवान टिकेश्वर ध्रुव दंतेवाड़ा में ही अपनी पत्नी तारिणी और 4 साल की बेटी नम्रता के साथ रहता था। वे अपने पति के शव के साथ ही परेवाडीह पहुंचेंगे। परिजनों ने बताया कि टिकेश्वर अपनी पत्नी और बेटी से बेइंतहा प्यार करता था। उसका सपना था कि नम्रता को वह डाक्टर बनाएगा देखना है अब उसके इस सपने में कौन पंख लगाता है।