
धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में जनपद पंचायत में फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी हथियाने के मामले में आरटीई कार्यकर्ता कृष्णकुमार साहू ने पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अपना बयान दर्ज कराया है। उल्लेखनीय है कि इस मामले में पूर्व में 11 शिक्षाकर्मियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। बाद में वे जमानत पर रिहा हो गए थे।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को शिक्षाकर्मी भर्ती फर्जीवाड़े की सुनवाई के लिए दायर याचिका की कुरूद न्यायालय में सुनवाई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस प्रशासन ने याचिकाकर्ता आरटीआई कार्यकर्ता कृष्ण कुमार साहू को सशस्त्र सुरक्षा बल के घेरे में न्यायालय में लाया। यहां दोपहर 1 बजे प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी वंदना वर्मा के न्यायालय में उनका बयान दर्ज किया गया।
करीब चार घंटे तक चले जिरह में बचाव पक्ष के पांच वकीलों ने कृष्णकुमार साहू से सवाल-जवाब किया। करीब साढ़े 4 बजे यह जिरह खत्म हुई। गौरतलब है कि मगरलोड जनपद पंचायत में वर्ष-2008 में शिक्षाकर्मी वर्ग-3 की भर्ती हुई थी। कुछ शिक्षाकर्मियों की डिग्री में संदेह होने पर आरटीई के तहत रिकार्ड निकाला गया। बताया गया है कि प्रारंभिक जांच में 11 शिक्षाकर्मियों की डीएड की डिग्री पर संदेह हुआ। इसके बाद जब जनपद पंचायत ने जांच की, तो पाया कि डिग्री में छेडख़ानी की गई है। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने उक्त सभी शिक्षाकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में वे जमानत पर रिहा हो गए।
वर्ष-2005 से लेकर 2008 तक हुई शिक्षाकर्मी भर्ती में करीब 30 फीसदी शिक्षाकर्मियों की डिग्री को फर्जी बताया जा रहा है। इनमें बीएड, डीएड से लेकर खेलकूद, विकलांगता, अनुभव प्रमाण पर सवाल उठाया गया है। इसके अलावा कई लोगों की अंकसूची छत्तीसगढ़ से बाहर की है। शिकायतों के बाद जिला पंचायत ने इसके सत्यापन के लिए प्रक्रिया शुरू कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक संबंधित शिक्षाकर्मियों ने भर्ती के दौरान जो डीएड का प्रमाण पत्र संलग्न किया गया है, उनमें कुछ का प्रमाण पत्र मध्यप्रदेश के भिंड, रायपुर रविग्राम के नायडू हायर सेकंडरी स्कूल तथा डाइट नगरी, बस्तर और रायपुर का प्रमाण पत्र है, जिसकी सत्यता पर सवालिया निशान उठाया गया है।