- पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर की रहने वाली 15 वर्षीय बालिका का किया था अपहरण- गुजरात के राजकोट ले जा रहा था आरोपी बदमाश, बालिका की सजगता से बची जान
धार.
फेसबुक पर दोस्ती कर सिंगर बनाने का झांसा देकर कक्षा दसवीं की छात्रा का अपहरण कर बदमाश उसे गुजरात के राजकोट ले जा रहा था। छात्रा का अपहरण पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर के रायगंज बस स्टैंड से बदमाश परेश पिता जयंतीभाई राठौर(३२) निवासी गोंडल-राजकोट ने किया था। बस बदलकर वह छात्रा को कलकत्ता लेकर आया और वहां से इंदौर आ गया। इंदौर से स्लीपर बस के जरीए वह राजकोट जाने वाला था। लेकिन इस बीच छात्रा ने मौका पाकर एक महिला के फोन से अपने पिता को घटना की जानकारी दे दी। पश्चिम बंगाल पुलिस पहले से ही छात्रा की लोकेशन ट्रेस करने में लगी हुई थी। इस कारण पश्चिम बंगाल पुलिस ने इंदौर की महिला से संपर्क किया और इंदौर के छोटी ग्वालटोली टीआइ सविता चौधरी की मदद से छात्रा को ट्रेस करने के लिए सर्चिंग शुरू करवाई। इसका नतीजा रहा कि वक्त पर धार पुलिस को सूचना मिली कि गुजरात जाने वाली चामुंडा ट्रेवल्स की बस में आरोपी परेश अपहरण कर छात्रा को ले जा रहा है। 13 जनवरी की शाम धार कंट्रोल रूम से नौगांव थाने के एएसआइ भेरूसिंह देवड़ा को घटना की जानकारी मिली, इस पर छात्रा को आरोपी परेश के चंगुल से मुक्त करवाकर आरोपी परेश को हिरासत में ले लिया गया।
पिता व पुलिस के सुपुर्द किया छात्रा को
इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर डिस्ट्रिक्ट से पुलिस व छात्रा के पिता शनिवार को धार पहुंचे। वन स्टॉप सेंटर पर बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष हर्षा रूनवाल, सदस्य मिताली प्रधान व अन्य सदस्यों ने छात्रा को पिता व पुलिस के सुपुर्द किया। इस घटना के कारण छात्रा पूरी तरह घबराई हुई थी। सदस्यों और अन्य लोगों ने उसका हौंसला बढ़ाया। इधर आरोपी परेश को भी शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर पुलिस ने आरोपी परेश की ट्रांजिट रिमांड मांगी।
तीन माह से कर रहा था चैटिंग
इधर बताया जा रहा है कि छात्रा और आरोपी परेश की बातचीत फेसबुक से शुरू हुई। दो-तीन माह पहले इसकी शुरूआत हुई थी। आरोपी परेश ने अन्य युवक का फोटो लगाकर अपनी प्रोफाइल बनाई थी। इस कारण छात्रा को शंका भी नहीं हुई। सिंगर बनाने का कहकर उसने छात्रा का अपहरण किया। अपहरण करने के बाद इंदौर तक का सफर करने के दौरान आरोपी परेश ने अपने मोबाइल की बजाय अन्य लोगों से मांगकर सफर किया। ताकि पुलिस उसे ट्रेस न कर सके।