-डीआरपी लाइन में दिया गया पुलिसकर्मी व अधिकारी सीपीआर का प्रशिक्षण
धार.
सीपीआर कोई दवा या इंजेक्शन नहीं है। यह एक तरह की प्रक्रिया है, जिसे मरीज के शरीर पर इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया में व्यक्ति की सांस रुक जाने पर सांस वापस लाने तक या दिल की धडक़न सामान्य हो जाने तक छाती को दबाया जाता है, जिससे शरीर में पहले से मौजूद खून संचारित होने लगता है। साथ ही इस प्रक्रिया में मरीज के मुंह में मुंह से सांस भी दी जाती है। कुछ इसी तरह का प्रशिक्षण धार पुलिस द्वारा शनिवार को डीपीआर लाइन में पुलिसकर्मी सहित अधिकारियों को दिया गया।
कार्यक्रम में मौजूद पुलिसकर्मी व अधिकारियों को डॉ अशोक जैन, डॉ कुसुम पाटीदार व निजी नर्सिंग कॉलेज की टीम ने प्रशिक्षण दिया। इस दौरान सभी को बताया गया कि सीपीआर या कृत्रिम श्वसन को सीधे शब्दों में कहें तो कई बार व्यक्ति की अचानक सांस रुक जाती है या फिर कार्डिएक अरेस्ट की स्थिति में सांस नहीं आती है तो इस अवस्था में सीपीआर दिया जाता है। इसकी वजह से लोगों की जान बचाई जा सकती है। एक तरह से सीपीआर में बेहोश व्यक्ति को सांसें दी जाती हैं, जिससे फेफड़ों को ऑक्सीजन मिलती है। साथ ही इससे शरीर में पहले से मौजूद ऑक्सीजन वाला खून संचारित होता रहता है। इसके साथ ही इसका डेमो भी दिया गया।
अपनों या फिर लोगों की जान बचा सकते है
एसपी आदित्यप्रताप सिंह ने कहा कि सीपीआर का प्रशिक्षण आप सभी के लिए इसलिए जरूरी है कि जरूरत के समय आप लोगों या फिर अपनों की जान बचा सकते है। आप सभी पुलिसकर्मी अलग-अलग स्थानों पर ड्यूटी देते है और आपके सामने ऐसे परिस्थितियां बनती है कि एंबुलेंस आने में समय लगा रहा है तो आप दुर्घटना में घायल व्यक्ति को सीपीआर देकर उसकी जान बचा सकते है। सीपीआर को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) कहते हैं। अगर किसी कारण कोई व्यक्ति बेहोश हो गया हो, दिल की धडक़न बंद हो गई हो या पल्स नहीं चल रहा हो, तो ऐसी स्थिति में सीपीआर ही दी जाती है। इसकी मदद से मरीज को सांस लेने में सहायता मिलती है। दरअसल सीपीआर देने के दौरान हार्ट और ब्रेन में ब्लड सक्र्युलेशन में सहायता मिलती है। सीपीआर की मदद से व्यक्ति को एक नया जीवन भी मिल सकता है।
प्राथमिक चिकित्सा यानी फस्र्ट एड है सीपीआर
डॉ अशोक जैन ने कहा कि अगर व्यक्ति की सांस या धडक़न रुक गई है तो पर्याप्त ऑक्सीजन के बिना शरीर की कोशिकाएं बहुत जल्द खत्म होने लगती हैं। वहीं इसका असर दिमाग पर भी पड़ता है, जिससे गंभीर व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। ऐसी स्थिति में अगर सीपीआर दिया जाता है तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। इससे जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। यह भी एक तरह की प्राथमिक चिकित्सा यानी फस्र्ट एड है। जब किसी पीडि़त को सांस लेने में दिक्कत हो या फिर वो सांस न ले पा रहा हो और बेहोश जो जाए तो सीपीआर से उसकी जान बचाई जा सकती है। बिजली का झटका लगने पर, पानी में डूबने पर और दम घुटने पर सीपीआर से पीडि़त को आराम पहुंचाया जा सकता है। हार्ट अटैक यानी दिल का दौरा पडऩे पर तो सबसे पहले और समय पर सीपीआर दे दिया जाय तो पीडि़त की जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। एडिशनल एसपी देवेंद्र पाटीदार ने कहा कि जिले के सभी पुलिसकर्मी को एक दिन के प्रशिक्षण के बाद उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वह सीपीआर देने में ट्रेन हो जाए और जरूरत पडऩे पर वह इसका इस्तेमाल करके लोगों की जिंदगी बचा सकें। जिला पत्रकार संघ अध्यक्ष छोटू शास्त्री डॉ. कुसुम पाटीदार ने भी संबोधित किया।