Dhar Bhojshala Dispute: धार भोजशाला मामले में हाईकोर्ट में लगातार हो रही सुनवाई, तीसरे दिन हुा बड़ा खुलासा, मुस्लिम पक्ष ने पेश किया शपथ पत्र, बताया पहले मंदिर था या बनी खी मस्जिद, सच आया सामने..
Dhar Bhojshala dispute: धार के विवादित भोजशाला परिसर (Dhar Bhojshala) को लेकर हाईकोर्ट में लगातार तीसरे दिन सुनवाई जारी रही। दो घंटे तक हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने अपनी बात रखी। पक्ष रखते हुए अभिभाषक विष्णु शंकर जैन ने इस मामले के पक्षकार मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी के हाईकोर्ट में पेश किए गए शपथ-पत्र को रखते हुए दलील दी कि सोसायटी ने माना है कि इस मस्जिद का अस्तित्व 14वीं सदी पूर्व नहीं था।
उन्होंने बताया कि इसी शपथ-पत्र में माना गया है कि इसके निर्माण(Dhar Bhojshala) में जिन पत्थरों का उपयोग हुआ, वो यहां मौजूद मंदिर भोजशाला के थे। इसी कारण इसमें संस्कृत के श्लोक भी हैं। इस्लाम में किसी मंदिर को तोड़कर या उसी जगह पर मस्जिद बनाने को गलत माना गया है। हमने जो फोटो और बातें रखी हैं, उनका कहीं भी सोसायटी ने विरोध नहीं किया, न ही इन्हें नकारा है।
अभिभाषक जैन ने अपनी दलीलों को लेकर जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष साफ कहा कि वे केवल आस्था या धार्मिक विश्वास के आधार पर केस नहीं लड़ रहे। वैज्ञानिक सबूतों (Dhar Bhojshala) के आधार पर अपना हक मांग रहे हैं। मामले में अब गुरुवार को भी सुनवाई होगी।
अभिभाषक जैन ने आगे कहा कि गुलाम वंश, खिलजी वंश, मुगलों का समय, ये ऐसे दौर रहे हैं जब हिंदुओं के धार्मिक अधिकारों को उनसे छीना गया था। धार्मिक स्थानों पर पूजा-अर्चना पर पाबंदी लगाई गई थी। जबकि वर्ष 1950 में भारत में संविधान लागू होने के बाद सभी को अनुच्छेद-25 और 30 के तहत अधिकार मिले, तो यह अधिकार भी मिला कि सभी अपने धार्मिक रिवाजों का पालन करने और अपने शैक्षणिक संस्थानों के संरक्षण के अधिकार के पात्र हैं। गुलाम वंश या खिलजी वंश के शासकों ने आदेश दिए थे, वो आदेश भारत में संविधान आने के बाद लागू नहीं किए जा सकते। कोर्ट ने उन्हें टोकते हुए इसका आशय उनसे पूछा तो जैन ने कहा, इन शासकों ने ही धर्मस्थलों को तोड़कर बदला था।
सुनवाई (Dhar Bhojshala) के दौरान अभिभाषक जैन ने अपनी दलीलों को पुख्ता करने के लिए पूर्व में सुप्रीम कोर्ट, इलाहबाद हाईकोर्ट सहित अन्य हाईकोर्ट द्वारा अलग-अलग मामलों में दिए आदेशों का हवाला भी दिया। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए फैसले को कई दलीलों के समर्थन में रखा।