
सर्वज्ञ पुरोहित. धार. एक समय था जब पेंटरों के लिए दोनों दल के प्रत्याशी इंतजार करते थे। वहीं पेंटरों को भी सुबह से लेकर रात तक फुर्सत तक नहीं मिलती थी।
अब जमाना धीरे-धीरे बदलता सा गया है। अब हर कोई हाईटैक होता नजर आ रहा है। वहीं दीवारों और बैनर्स पर स्लोगन व नारे लिखने वाले जैसे-तैसे गुजरा करके अपना समय निकल रहे है। वहीं पेंटरों का कहना है कि संचार क्रांति के आने से सब कुछ बदल गया है अब तो जैसे-तैसे काम करके घर चला रहे है। आईए जानते है उन पेंटरों का दर्द।
ट्रॉली पर कर रहा हूं पेंट
मुझे पेंट करते हुए करीब 33 साल का समय हो चला है। एक समय था जब दीवारों पर स्लोगन लिखने के लिए सुबह से रात हो जाती थी। इसके साथ ही दोनों दल के कार्यकर्ता सुबह से घर आ जाते थे और दीवारों पर अपने दल का प्रचार-प्रसार करने के लिए कहते थे। अब तो संचार क्रांति के चलते सब कुछ बदल गया है। अब दीवारों और बैनर्स पर लिखवाने के लिए कोई भी प्रत्याशी नहीं आता है। मैं तो अब ट्रैक्टर ट्रॉली पर पेंट करके अपने घर का गुजरा कर रहा हूं।
- बापू सुरवे, पेंटर, धार
फ्लैक्स चल रहे हैं बाजार में
बैनर्स पर पेंट करते मुझे 30 साल से अधिक समय हो गया। जब भी चुनाव आते थे तो खाना-खाने की फुर्सत नहीं मिलती थी। सुबह से रात तक घर के सभी सदस्य मदद करते थे। जब से फ्लैक्स का चलन बढ़ा है तो बैनर्स बनवाने कोई नहीं आता। इसके अलावा व्हाट्स एप्प, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार ज्यादा हो गया है। अब तो स्थिति यह है कि यह काम नहीं के बराबर आ रहा है। शादियों या फिर किसी कार्यक्रम के लिए थर्माकोल पर पेंट करने के लिए ही लोग आ रहे है।
-रवींद्र कुमार वर्मा, पेंटर चित्रांशी कला, धार