
TI Dilip Puri murder case: जिस बेटे को नवरात्र पर हंसते-हंसते घर से विदा किया था, सोमवार को वही बेटा तिरंगे में लिपटकर लौटा तो माता-पिता की दुनिया उजड़ गई। बेटे का चेहरा देखते ही मां-पिता और बहन का धैर्य जवाब दे गया। घर के बाहर जुटे ग्रामीणों की आंखें भी नम थीं। हर तरफ भारत माता की जय और शहीद दिलीप पुरी अमर रहें के नारे गूंज रहे थे। देवास जिले के खातेगांव में शराब तस्करी के वाहन को रोकने के दौरान हुए घटनाक्रम में टीआई दिलीप पुरी की जान चली गई थी। रविवार रात हुई इस घटना की खबर सोमवार सुबह धार जिले के बरमंडल गांव पहुंची तो पूरा गांव शोक में डूब गया।
दिलीप सिर्फ पुलिस अधिकारी नहीं, गांव के उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा थे, जिन्हें उन्होंने कभी शिक्षक बनकर पढ़ाया था। दिलीप ने तीन साल तक गांव के सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षक के रूप में बच्चों को शिक्षा दी। वर्ष 2007 में पुलिस विभाग में भर्ती होने के बाद उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाई और खाकी वर्दी का सम्मान करते हुए कर्तव्य की राह पर प्राण गंवा दिए।
खातेगांव में पीएम के बाद शहीद दिलीप पुरी को एम्बुलेंस से इंदौर स्थित ओमेक्स सिटी स्थित उनके निवास पर ले जाया गया। अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का तांता लगा रहा। देवास कलेक्टर नेहा मीना और देवास के पूर्व एसपी पुनीत गेहलोत वहां पहुंचे। साथी को खोने पर पूर्व एसपी के आंसू छलक आए। ओमेक्स सिटी स्थित निवास पर शव रखने के बाद शव पैतृक गांव बरमंडल ले जाया गया।
बेटे को खोने का दर्द पिता ओमप्रकाश पुरी के शब्दों में साफ झलक रहा था। उन्होंने घटना को महज दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित मर्डर हैं। उन्होंने घटनाक्रम में प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की। पिता ने भावुक होकर बताया कि दिलीप पढ़ाई में होनहार थे। धार से बीएससी, एमएससी की। तब आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर परिवार ने जमीन बेचकर पढ़ाया। पुलिस सेवा में आने से पहले करीब तीन साल तक गांव के स्कूल में शिक्षक रहे। 2007 में एसआइ के रूप में पुलिस में भर्ती हुए। हाल ही में सतवास से खातेगांव थाना प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। परिवार में पत्नी, 17 वर्षीय बेटी त्रिषा और सात साल का बेटा अवि हैं। माता-पिता बरमंडल में रहते हैं। छोटा भाई इंदौर में नौकरी करता है।
दिलीप पुरी की अंतिम यात्रा में शासन की ओर से राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र शिवाजी पटेल भी शामिल हुए। उन्होंने दिवंगत टीआई को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान ग्रामीणों ने मंत्री को मांग पत्र सौंपकर घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने और गांव के शासकीय विद्यालय का नाम स्वर्गीय टीआई दिलीप पुरी के नाम पर करने की मांग रखी। मंत्री ने इस संबंध में कलेक्टर को जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए।