
Dhanteras 2026: इस बार दीपावली का पंचांगीय गणित विशेष रहने वाला है। तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण धनतेरस दो दिन मनेगी। ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार 5 नवंबर को रमा एकादशी और गौवत्स द्वादशी मनाई जाएगी। 6 नवंबर को प्रदोष काल में धनतेरस पर खरीदारी का महामुहूर्त रहेगा। 7 को भगवान धन्वंतरि की जयंती मनेगी। इस तरह धन और स्वास्थ्य की कामना के लिए श्रद्धालुओं को दो दिन मिलेंगे।
त्रयोदशी 7 नवंबर को सुबह 10.50 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्दशी प्रारंभ होगी। नरक चतुर्दशी ब्रह्म मुहूर्त का पर्व है। इस दिन पितरों के निमित्त उल्का दान और दीपश्राद्ध की परंपरा है। 8 नवंबर को चतुर्दशी सुबह 11.30 बजे तक रहने के बाद अमावस्या प्रारंभ होगी। प्रदोष काल में माता लक्ष्मी के पूजन की मान्यता है, इसलिए दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन 8 की शाम को होगा। पंचांगों में तिथियों के समय में एक-दो घंटे का अंतर हो सकता है, इसलिए श्रद्धालु स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का मुहूर्त तय कर सकते हैं।
धर्मशास्त्रों में कार्तिक माह का विशेष महत्व है। कृष्ण पक्ष के अलावा शुक्ल पक्ष में अन्नकूट, भाई दूज, सौभाग्य पंचमी, छठ पूजा, गोपाष्टमी, आंवला नवमी, देव प्रबोधिनी एकादशी, वैकुंठ चतुर्दशी और कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाती है।
दीपोत्सव का पहला दिन धनत्रयोदशी के नाम रहेगा। द्वादशी तिथि सुबह 10.31 बजे समाप्त होगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होकर प्रदोष काल और पूरी रात्रि रहेगी। ऐसे में धनतेरस, धन्वंतरि जयंती और यमदीपदान इसी दिन होंगे। आरोग्य, समृद्धि और मंगलकामना के साथ घरों में दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।
धनतेरस पर वैसे तो सोना, चांदी और बर्तन खरीदना बहुत ही शुभ समझा जाता है लेकिन इस दिन धनिया खरीदने की भी मान्यता है। मान्यता है कि धनिया खरीदने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है। धनिया खरीद कर मां लक्ष्मी के चरणों में अर्पित करने प धन धान्य की कभी कोई कमी नहीं होगी और घर हमेशा खुशियों से परिपूर्ण रहेगा।
5 नवंबर, गुरुवारः रमा एकादशी, गौवत्स द्वादशी
6 नवंबर, शुक्रवारः प्रदोष व्रत, धनतेरस
7 नवंबर, शनिवारः धनतेरस और धन्वंतरि जयंती
8 नवंबर, रविवारः सुबह नरक चतुर्दशी, शाम को महालक्ष्मी पूजन
10 नवंबर, मंगलवारः अन्नकूट, गोवर्धन पूजा
11 नवंबर, बुधवारः भाई दूज
14 नवंबर, शनिवारः सौभाग्य पंचमी, पांडव पंचमी
15 नवंबर, रविवारः सूर्य छठ
17 नवंबर, मंगलवारः गोपाष्टमी