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Vijayadashami 2026: दशहरे पर शमी के पत्ते बांटने की परंपरा क्यों? जानिए कैसे पेड़ से बरसा था सोना

Dussehra Shami tree significance: दशहरे (Vijayadashami 2026) पर रावण दहन तो आपने देखा होगा, लेकिन क्या जानते हैं कि इस दिन शमी के पत्ते सोना मानकर क्यों बांटे जाते हैं? जानिए इसके पीछे की रोचक पौराणिक कथा।
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Oct 19, 2026
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Dussehra Shami tree significance: दशहरे पर शमी के पत्ते बांटने की परंपरा क्यों? (फोटो सोर्स- ChatGPT)

Dussehra Shami tree significance: इस बार विजयदशमी (Vijayadashami 2026) 20 अक्टूबर को है। शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन दशहरा पर्व मनाया जाता है। विजयादशमी यानी दशहरे के दिन रावण दहन होता है और इसी के बाद सभी राज्यों व जगहों पर कई तरह की मान्यताओं को मनाया जाता है। वहीं विजयादशमी पर रावण दहन के दिन शमी के पेड़ और उसके पत्तों के वितरण का खास महत्व है। चलिए पंडित जगदीश शर्मा के समझते है कि इस दिन शमी के पत्तों ता पूजन व पत्तों को बांटने का प्रचलन क्यों है?

शमी वृक्ष के पूजन का क्या है कारण?

विजयादशमी के दिन इसकी पूजा करने का एक तात्पर्य यह भी है कि यह वृक्ष आने वाले संकट का पहले से संकेत दे देता है। शमी वृक्ष की पूजा के पीछे एक और कहानी प्रचलित है। जिस साल शमी वृक्ष ज्यादा फूलता-फलता है उस साल सूखे की स्थिति का निर्माण होता है।

महाभारत से जुडी है शमी वृक्ष की कहानी

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत युद्ध में पांडवों ने शमी के वृक्ष पर ही अपने हथियार छुपाए थे। बाद में उन्हीं हथियारों से पांडवों कौरवों को हराकर विजय प्राप्त की थी। एक मान्यता के अनुसार कवि कालिदास को शमी के वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या करने से ही ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

विजयादशमी के संदर्भ में पौराणिक कथा

एक समय की बात है कि महर्षि वर्तन्तु का शिष्य कौत्स थे। महर्षि ने अपने शिष्य कौत्स से शिक्षा पूरी होने के बाद गुरू दक्षिणा के रूप में 14 करोड़ स्वर्ण मुद्रा की मांग की थी। महर्षि को गुरू दक्षिणा देने के लिए कौत्स महाराज रघु के पास गए। महाराज रघु ने कुछ दिन पहले ही एक महायज्ञ करवाया था, जिसके कारण खजाना खाली हो चुका था।

कौत्स ने राजा से स्वर्ण मुद्रा की मांग की तब उन्होंने तीन दिन का समय मांगा। राजा धन जुटाने के लिए उपाय खोजने लग गया। उसने स्वर्गलोक पर आक्रमण करने का विचार किया। राजा ने सोचा स्वर्गलोक पर आक्रमण करने से उसका शाही खजाना फिर से भर जाएगा। राजा के इस विचार से देवराज इंद्र घबरा गए और कोषाध्याक्ष कुबेर से रघु के राज्य में स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा करने का आदेश दिया।

इंद्र के आदेश पर रघु के राज्य में कुबेर ने शमी वृक्ष के माध्यम से स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा करा दी। माना जाता है कि जिस तिथि को स्वर्ण की वर्षा हुई थी उस दिन विजयादशमी थी। राजा ने शमी वृक्ष से प्राप्त स्वर्ण मुद्राएं कौत्स को दे दीं। इस घटना के बाद विजयादशमी के दिन शमी के वृक्ष के पूजा होने लगी।

Updated on:
19 Oct 2026 06:27 pm
Published on:
19 Oct 2026 06:27 pm