
Ravana Temple Dussehra 2026: 136 साल से सिर्फ दशहरे के दिन खुलता है ये मंदिर (फोटो सोर्स- Patrika)
Ravana Temple Dussehra 2026: नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-ैअर्चना करने के बाद 20 अक्टूबर को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतिक दशहरा मनाया जाएगा। समूचे भारतवर्ष में भगवान श्रीराम, भाई श्री लक्ष्मण और अपनी वानर के साथ रावण का वध करेंगे। हालांकि, भारत में एक ऐसा भी मंदिर है जो, सिर्फ दशहरे पर खुलता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन रावण स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देने आते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। आखिर क्या है इस अनोखी परंपरा का रहस्य? जानिए, उस मंदिर की कहानी, जिसके कपाट साल में सिर्फ एक दिन दशहरे पर खुलते हैं।
कानपुर के शिवाले में लंकानरेश का मंदिर बना हुआ है और 365 दिन में महज दशहरा के दिन खुलता है। मान्यता है कि इस खास त्योहर पर रावण सुबह से लेकर देरशाम तक यहां रहता है और अपने भक्तों को ज्ञान के साथ वरदान देकर उनके दुखों को हरता था।
मंदिर से जुड़े लोग बताते है कि शिवाले में इतिहासिक भगवान शिव का कैलाश मंदिर है। रावण शिव के भक्त थे। इसी के तहत महाराज गुरु प्रसाद शुक्ल ने 1890 में भगवान कैलाश के मंदिर की रखवाली करने के लिए रावण का मंदिर बनवाया था। परंपरा के अनुसार दशहरा की सुबह नौ बजे मंदिर के कपाट खोले गए रावण की प्रतिमा का साज श्रृंगार किया गया और आरती के भक्तों ने दशानन के दर्शन कर मन्नत मांगनी शुरू कर दी, जो देरशाम तक जारी रहेगी।
यह मंदिर साल में केवल दशहरे के दिन खुलता है। इस लिये पूरा दिन यहां श्रध्दालुओं का तांता लगा रहता है और पूजा अर्चना होती है। भक्तगण आरती के बाद सरसों के तेल का दिया जलाकर मन्नतें मांगते हैं। पिछले करीब 136 सालों से यहां रावण की पूजा की परंपरा का पालन हो रहा है। संध्या के समय रामलीलाओं में रावण वध के साथ ही मंदिर के द्वार अगले एक साल के लिये बंद कर दिए जाएंगे।
किवदंती है कि, जब महाराज गुरु प्रसाद शुक्ल ने शिव के मंदिर का निर्णाण करवाया, तब अपने भक्त के इस काम से प्रसन्न होकर रावण ने उन्हें दर्शन दिए थे। बताते हैं, इस मंदिर पर किसी प्रकार का चढ़ावा नहीं चढ़ता । मंदिर में पूजा के लिए आने वाले भक्त सिर्फ फूल और सरसों का तेल लेकर आते हैं । मान्यता है कि रावण मिठाई ग्रहण नहीं करता, और न ही उसके दरवार पर पैसा चढ़ता । रावण दान लेते नहीं दान देते हैं। उनके ही सोने की लंका का सोना है जो आज भी लोग ग्रहण करते हैं।
Updated on:
19 Oct 2026 05:48 pm
Published on:
19 Oct 2026 05:48 pm
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