22 जुलाई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

15 फीट ऊपर दिखता है शिवलिंग, 64 फीट जमीन के नीचे है हिस्सा, महाभारत काल में बना था पृथ्वीनाथ मंदिर

Shivling hidden underground: सावन में शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन यूपी के इस मंदिर में शिवलिंग का बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे छिपा है।
2 min read
Google source verification

भारत

image

Akash Dewani

Jul 22, 2026

Sawan 2026 prithvinath temple gonda 5000 year old shivling hidden underground

Shivling hidden underground: यूपी का ऐसा मंदिर जहां 15 फीट ऊपर दिखता है शिवलिंग, 64 फीट जमीन के नीचे है हिस्सा (फोटो सोर्स- Patrika)

Sawan 2026:सावन और चातुर्मास के पावन अवसर पर शिवभक्त देशभर के प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उत्तर प्रदेश में एक ऐसा अनोखा शिव मंदिर है जो हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का अनोखा केंद्र है। यहां मौजूद एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग जमीन के ऊपर 15 फीट और नीचे 64 फीट तक फैला है, जिसकी महिमा सावन में और भी खास मानी जाती है। आइए जानते है कौनसा है ये मंदिर और क्या है इसकी विशेषताएं?

5000 साल पुराना है ये मंदिर

उत्तर प्रदेश के गोंडा में स्थित पृथ्वीनाथ मंदिर (Prithvinath Temple) श्रद्धालुओं के बीच आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है। गोंडा स्थित एशिया के इस सबसे बड़े शिवलिंग की खास बात ये है कि ये 15 फुट ऊपर दिखता है और 64 फुट जमीन के नीचे है। इसलिए ये एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है। पुरातत्व विभाग के अनुसार, यह शिवलिंग लगभग 5 हजार वर्ष पुराना है। जो कि महाभारत काल का है।

माना जाता है एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग

एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग होने के साथ-साथ यह शिव मंदिर वास्तुकला का भी सर्वोत्तम नमूना है। गोंडा के इस शिव मंदिर को पृथ्वीनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि गोंडा के पृथ्वीनाथ मंदिर के इस शिवलिंग की स्थापना पांडुपुत्र भीस ने की थी। माना जाता है कि द्वापर युग में पांडवों के अज्ञातवास के दौरान भीम ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी।

मंदिर लेकर को प्रचलित है ये कथा

मान्यता है कि इस शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। महाभारत के अनुसार अज्ञातवास के दौरान जब भीम ने बकासुर का वध किया था, तो भीम पर ब्रह्महत्या का दोष लगा। तब भीम ने इस दोष से मुक्ति पाने के लिए शिवलिंग की स्थापना की थी। ये सात खखंडों का शिवलिंग है, जो 15 फुट ऊपर दिखता है और 64 फुट जमीन के नीचे है। साथ ही यह मंदिर 5 हजार साल पुराना है। बताया जाता है कि भीम द्वारा स्थापित यह शिवलिंग धीरे-धीरे जमीन में समा गया।

एक बार खरगूपुर के राजा मानसिंह की अनुमति से पृथ्वीनाथ सिंह नाम के एक शख्स ने मकान निर्माण के लिए यहां पर खुदाई शुरू की, तो पृथ्वीनाथ सिंह को सपना आया कि उस जमीन के नीचे सात खंडों का एक शिवलिंग दबा हुआ है। तब उन्होंने वहां खुदाई की और शिवलिंग मिला। फिर इस शिवलिंग की पूजा-अर्चना शुरू हुई और तब से इस मंदिर का नाम पृथ्वीनाथ मंदिर पड़ गया। इस शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का विशेष प्रावधान है। इसकी ऊंचाई अधिक होने के कारण एड़ी उठाकर ही जलाभिषेक किया जाता है।

शिव हैं परिवर्तन के देवता

जब-जब सृष्टि में उथल-पुथल होती है, तब-तब भोलेनाथ ही जगत का मार्गदर्शन करते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, चातुर्मास में जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में जाते हैं, तब देवों के देव महादेव ही पूरी सृष्टि के संचालन की बागडोर संभालते हैं। त्रिमूर्ति (कह्मा, विष्णु, महेश) की अवधारणा में भगवान शिव को संहारक और पुनर्जन्म या परिवर्तन का देवता माना जाता है। उनके बिना सृष्टि का चक्र अधूरा है। शिव को 'भोलेनाथ' भी कहा जाता है, क्योंकि वे बहुत ही दयालु हैं और अपने भक्तों की भक्ति से बहुत जल्दी प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इन चार महीनों में सृष्टि की पूरी कमान भोलेनाथ के हाथों में होती है।