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तुरंत फल दे सकती है मां की यह साधना, उपासना के 3 दिन अत्यंत श्रेष्ठ

Kali Puja Vidhi : नवरात्रि में मां काली की विशेष महत्ता, इनका स्वरूप उग्र, मां काली की पूजा देती तीक्ष्ण फल पर साधना में कई कठिन नियमों का पालन करना जरूरी
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भारत

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deepak deewan

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Oct 16, 2026

कालीघाट

Kalighat Temple: कालीघाट मंदिर (फोटो सोर्स:@iAkankshaP)

Maa Kali Puja Vidhi : नवरात्रि का चरम चरण आ चुका है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी- तीन महा पूजाओं की तिथियां आ रहीं हैं। सनातन धर्म में साधना के लिए शारदीय नवरात्र की ये तीनों तिथियां अत्यंत श्रेष्ठ मानी गई हैं। मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के साथ इन तिथियों पर महाकाली की उपासना की विशेष महत्ता बताई गई है। काली का अर्थ होता है काल अर्थात समय। वे 10 महाविद्याओं में से एक हैं जिनके प्रचंड स्वरूप के ध्यान मात्र से ही शरीर का रोम-रोम मानो सिहरन उठता है।

खास बात यह है कि मां काली की साधना तीक्ष्ण फल देनेवाली होती है पर प्राय: गृहस्थ लोगों को इससे दूर रहने को कहा जाता है। दरअसल उनकी उपासना बेहद कठिन है। मां काली की साधना में कई कठोर नियमों का पालन करना जरूरी होता हैै। इसके अभाव में साधक पर दुष्प्रभाव की आशंका बढ जाती है। महाकाली की साधना करनेवालों को सब कुछ प्राप्त हो सकता है लेकिन इससे पहले उन्हें मां की कठिन परीक्षा से भी गुजरना पड़ता है। विशेष रूप से सांसारिक सुख की चाह में भक्ति करनेवालों को बहुत शोक झेलने पड़ते हैं। साधारण भक्त तो इससे बहुत परेशान हो जाते हैं।

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ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि महाकाली साधना से अष्टसिद्धि प्राप्त होती है। वे मूलतः श्मशान की देवी हैं। यही वजह है कि माता काली की साधना किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन के बिना नहीं करना चाहिए। दांपत्य जीवन जी रहे भक्तों को प्राय: माता काली की घोर उपासना की मनाही तक की जाती है। उन्हें माता की केवल सामान्य पूजा-अर्चना करने की ही सलाह दी जाती है। मां काली सती और पार्वती का स्वरूप हैं। कालिका पुराण में उनकी महिमा का उल्लेख किया गया है।

सबसे प्रभावशाली

सती रूप में माता काली ने ही 10 महाविद्याओं के माध्यम से शिवजी को अपने 10 जन्मों की झलक दिखाई थी। वे सबसे जागृत देवी हैं। मां काली के 4 मुख्य रूप हैंः दक्षिणा काली, श्मशान काली, मातृ काली और महाकाली। तुरंत परिणाम प्रदान करने के कारण महाकाली साधना दस महाविद्याओं में सबसे प्रभावशाली मानी गई हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि त्रिशूल और तलवार माता काली के शस्त्र हैं। उन्होंने ही महिषासुर जैसे महा असुर का वध किया था। धूम्राक्ष, शुम्भ-निशुम्भ, चंड-मुंड आदि राक्षसों का भी मां काली ने ही संहार किया था। वे ही रक्तबीज का नाश करनेवाली देवी हैं। पूर्ण श्रद्धा से उपासना करने से मां काली प्रसन्न होती हैं। वे अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी कर देती हैं।

मां काली के मंत्र:

सरल मंत्र नवार्ण मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे
मंत्र- ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा