
Maa Kalaratri Puja Vidhi Mantra: नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा विधि और मंत्र (फोटो सोर्स- Chatgpt)
Maa Kalaratri Puja Vidhi Mantra: देवीभाग्वत पुराण बताया गया है कि शारदीय नवरात्रि के सातवां दिन मां कालरात्रि की आराधना का माना जाता है। कालिख के समान स्वरूप होने के कारण ही इनका नाम कालरात्रि पड़ा। इनके बाल बिखरे हुए हैं और इनके गले में दिखाई देने वाली माला बिजली की भांति चमकती है। इन्हें तमाम आसुरिक शक्तियों का विनाश करने वाला बताया गया है। विभिन्न मान्यताओं की अनुसार, दुर्गा मां यह स्वरूप अत्यंत उग्र तथा भयंकर होता है। माता को 'शुभंकरी' के नाम से भी पूजा जाता है।
मां कालरात्रि वर्ण काजल के जैसा काला है और बाल बिखरे हुए हैं। गले में बिजली के समान चमकने वाली माला सुशोभित होती है। माता गर्दभ अर्थात गधे पर आरूढ़ होकर, अपने चार हाथों में खड्ग, लौह-कंटक, अभय-मुद्रा तथा वर-मुद्रा धारण करती हैं। वैदिक शास्त्रों में माता कालरात्रि को शनि ग्रह का भी अधिष्ठाता माना गया है।
सामान्य मंत्र- ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
बीज मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्रै नमः॥
दुर्गति नाशक मंत्र- ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा॥
प्रार्थना मंत्र:- या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
दंष्ट्राकरालवदने शिरोमालाविभूषणे।
चामुण्डे मुण्डमथने नारायणि नमोऽस्तु ते।
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम ।
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है, जिन्हें भय और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी कहा जाता है। माता की पूजा में मां की आरती, कथा, मंत्र और माता के स्त्रोतम् का बहुत महत्व होता है, जिनका श्रद्धापूर्वक पाठ करने से जीवन की बाधाएँ और संकट दूर होते हैं। माँ कालरात्रि की कृपा से भक्तों को साहस, सुरक्षा और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
Updated on:
16 Oct 2026 03:06 pm
Published on:
16 Oct 2026 03:06 pm
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