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लाल बहादुर शास्त्री जयंति 2 अक्टूबर 2019 : भारत माँ के लाल बहादुर

Lal Bahadur Shastri Jayanti : भारत माँ के लाल बहादुर

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Oct 02, 2019
लाल बहादुर शास्त्री जयंति 2 अक्टूबर 2019 : भारत के लाल बहादुर

आज भारत माँ लाल बहादुर जी की जन्म जयंती पर ऐसे संस्मरण जो कभी भी भुलाए न जा सकेंगे

जातिसूचक से मुक्ति

भारत की स्वंतन्त्रता के बाद शास्त्री जी को उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था जहां उन्हें पुलिस एवं परिवहन मंन्त्रालय सौंपा गया। परिवहन मंत्री के कार्यकाल में उन्होंने प्रथम बार महिला कण्डक्टर्स की नियुक्ती की थी। इतना ही नही उन्हों भीड़ को नियंत्रण में रखने के लिए लाठी की जगह पानी की बौछार का प्रयोग प्रांरम्भ कराया। काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि मिलते ही लाल बहादुर शास्त्री जी ने जन्म से चला आ रहा जातिसूचक शब्द श्रीवास्तव हमेशा-हमेशा के लिए हटा दिया और अपने नाम के आगे ‘शास्त्री’ लगा लिया।

पाकिस्तान को शिकश्त दी

1965 में पाकिस्तान ने भारत पर सायं 7 बजकर 30 मिनट पर हवाई हमला कर दिया। राष्ट्रपति ने आपात बैठक बुलाई जिसमें शास्त्री जी से पूछा गया कि, “अब हमें क्या करना चाहिए? शास्त्री जी ने एक वाक्य में तत्तकाल उत्तर दिया, “आप देश की रक्षा कीजिये और मुझे बताइयों कि हमें क्या करना है।” बस फिर क्या था, शास्त्री जी के नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान को शिकश्त दी।

देश के दुसरे प्रधानमंत्री बने

नेहरू जी के देहांत के बाद 9 जून 1964 को शास्त्री जी को देश के दुसरे प्रधानमंत्री बने। जब 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ तब शाश्त्री जी के नारे “जय जवान जय किसान” ने पूरे देश में एक नयी ऊर्जा का संचार कर दिया था। इसी युद्ध की समाप्ति के लिए शाश्त्री जी रूस के ताशकंद शहर गए और समझौते पर हस्ताक्षर करने के ठीक एक दिन बाद 11 जनवरी 1966 को कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटने के कारण शास्त्री जी का देहांत हो गया। इस खबर को सुनकर विश्व के अनेक नेताओं की आंखें नम हो गईं। उनका जीवन परिवार तक सिमित नही था, वे पूरे देश के लिये जिये और अंतिम यात्रा भी देश हित के विचार में ही निकली। 2 अक्टुबर को जन्मे शास्त्री जी सच्चे गांधीवादी थे। सादा एवं सच्चा जीवन ही उनकी अमुल्य धरोहर है।

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Updated on:
02 Oct 2019 10:07 am
Published on:
02 Oct 2019 10:03 am
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