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Ekadashi : केवल 16 सूक्त पढ़ने से प्रसन्न हो सकती हैं मां लक्ष्मी, प्रदान कर सकती हैं धन-संपदा

Parivartini Ekadashi 2026 : परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर को, श्रीसूक्त पाठ से लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं, विष्णुसहस्त्रनाम का भी कर सकते हैं पाठ
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Sep 19, 2026
laxmiji
श्रीसूक्त पाठ से लक्ष्मी होती हैं प्रसन्न : फोटो सोर्स : AI@Grok

Parivartini Ekadashi : भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इस बार एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात को प्रारंभ होगी और 22 सितंबर तक रहेगी। इससे एकादशी व्रत को लेकर भ्रम की स्थिति निर्मित हो गई है। अधिकांश पंचांगों के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर को रात 8 बजे शुरू होगी। यह 22 सितंबर को रात 9.43 बजे तक रहेगी। ऐसे में शास्त्रोक्त उदया तिथि के लिहाज से 22 सितंबर को एकादशी व्रत रखना उचित होगा। इस दिन श्रीसूक्त के शुरुआती 16 सूक्त पढ़ने से लक्ष्मीजी प्रसन्न होती है जिससे धन संपन्नता प्राप्त होती है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि एकादशी को बहुत ही शुभ फलदायी तिथि कहा गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मपुराण में परिवर्तिनी एकादशी के नाम से संबोधित किया गया है।

एकादशी पर व्रत करने और विष्णुजी की पूजा से महालक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हर साल प्राय: 24 एकादशी पड़ती हैं हालांकि अधिक मास में इनकी संख्या 26 एकादशी हो जाती है।

लक्ष्मीजी की प्रसन्नता के लिए श्रीसूक्त के शुरुआती 16 सूक्त पढ़ें

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार एकादशी पर विष्णुजी की विधिविधान से पूजा करने के साथ ही लक्ष्मीजी की भी पूजा करना चाहिए। इस दिन जीवन के सभी सुखों को प्राप्त करने के लिए विष्णुसहस्रनाम स्त्रोत्र और धन की कामना पर श्रीसूक्त का पाठ जरूर करना चाहिए। लक्ष्मीजी की प्रसन्नता के लिए श्रीसूक्त के शुरुआती 16 सूक्त अवश्य पढें। इससे आर्थिक संपन्नता प्राप्त होती है।

विष्णुसहस्रनाम स्त्रोत्र और श्रीसूक्त का पाठ करने में बमुश्किल आधा घंटा लगेगा लेकिन इससे लक्ष्मीनारायण का आशीर्वाद जरूर मिलता है। उनकी कृपा से जीवन के दुख दर्द, कष्ट दूर होते हैं और धन-संपत्ति, सुख ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

चातुर्मास की एकादशी व्रत का विशेष महत्व

धर्मग्रंथों में चातुर्मास की एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करें। यथासंभव दिनभर - ऊं नमो भगवते वासुदेवाय- मंत्र का मानसिक जप करें।

Updated on:
19 Sept 2026 01:51 pm
Published on:
19 Sept 2026 01:50 pm