
Mangal Gochar 2026 : (फोटो सोर्स: AI@Gemini)
Mangal Gochar : ग्रहों के सेनापति मंगल ने अपनी चाल बदल ली है। वे अपनी नीच राशि कर्क में प्रवेश कर चुके हैं। मंगल देव 12 नवंबर तक इसी राशि में रहेंगे। यह गोचर शीघ्रता से परिणाम देने वाला साबित होगा और देश और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में गति आएगी। ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास बताते हैं कि नीच अवस्था में होने के कारण मंगल नकारात्मक परिणाम दे सकते हैं। इसके कारण भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा के साथ अग्नि कांड, गैस दुर्घटना, वायुयान दुर्घटना होने की आशंका है। पूरे विश्व में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल होगा। सीमाओं पर तनाव शुरू हो जाएगा। मंगल की वजह से बड़ी दुर्घटना होने की आशंका है। देश के कुछ हिस्सों में हवा के साथ बारिश रहेगी। भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदा आने की भी आशंका है।
मंगल ग्रह भूमि, जमीन-जायदाद, प्रापर्टी, युद्ध, सेना, रक्त और क्रोध के कारक ग्रह माने जाते हैं। जब भी वे राशि परिवर्तन करते हैं तो इसका विशेष प्रभाव देश दुनिया के साथ लोगों के जीवन पर भी पड़ता है। वैदिक ज्योतिष में भूमि पुत्र मंगल को अग्नि का कारक कहा गया है इसलिए चन्द्रमा की राशि कर्क में जाकर वो नीच के हो जाते हैं। चन्द्रमा जल का कारक है और अग्नि जल का कोई मेल नहीं है इसलिए मंगल पूर्ण बलहीन होकर अपना कोई भी शुभ प्रभाव यहां नहीं देते हैं।
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि कर्क राशि में मंगल नीच के रहेंगे और मंगल का राहु के साथ षडाष्टक योग बनेगा जबकि शनि के साथ नवम पंचम योग निर्मित होगा। साथ ही केतु के मंगल का द्विद्वाश योग निर्मित होगा। हालांकि मंगल के साथ गुरु की युति भी होगी। कर्क राशि में पहले से गुरु विराजमान हैं। इस तरह से मंगल-गुरु की युति होने से मंगल का नीच का प्रभाव कुछ कम हो जाएगा।
मंगल का कर्क राशि में गोचर यानी जल तत्व की राशि में अग्नि तत्व ग्रह का प्रवेश देश दुनिया में उथल-पुथल मचा सकता है। दुनिया के कई देशों में तनाव और टकराव की स्थिति बढ़ सकती है। साथ ही इसका असर कई राशियों पर भी व्यापक रूप से देखा जाएगा।
डा. अनीष व्यास के अनुसार ज्योतिष शास्त्र में मंगल को सभी ग्रहों का सेनापति होने का दर्जा प्राप्त है। मंगल मेष राशि और वृश्चिक राशि के स्वामी माने गए हैं। कर्क राशि में मंगल को नीच का माना जाता है वहीं मकर राशि में वे उच्च के हो जाते हैं। सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति से इनकी मित्रता है। बुध से मंगल की नहीं बनती है जबकि शुक्र और शनि इनके सम संबंध हैं। मंगल देव पराक्रम, स्फूर्ति, साहस, आत्मविश्वास, धैर्य, देश प्रेम, बल, रक्त, महत्वकांक्षा एवं शस्त्र विद्या के अधिपति माने गए है। विशेष बात यह है कि अग्नि तत्व होने से मंगल सभी प्राणियों को जीवन शक्ति देता है। यह उत्साह एवं साहस का प्रेरक होता है।
Updated on:
19 Sept 2026 01:24 pm
Published on:
19 Sept 2026 01:22 pm
