स्कंदपुराण के अनुसार, कालांतर में कात्यायन ऋषि कोसी तट पर रहते थे और स्नान ध्यान करके मां भगवती की आराधना करते थे।
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इस मौके पर हम आपको एक ऐसे ऋषि के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने दर्शन दिया था। साथ ही, मां भगवती ने ऋषि के घर पुत्री बनकर जन्म भी ली थीं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, ऋषि कात्यायन ने एक बार देवी दुर्गा की कठोर तपस्या की थी। ऋषि की तपस्या से देवी दुर्गा प्रसन्न हुईं और उनके सामने प्रकट होकर दर्शन दी। देवी ने ऋषि कात्यायन से कहा कि वत्स मैं तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न हूं, वर मांगों।
उसके बाद ऋषि कात्यायन ने मां दुर्गा से कहा आप मेरे घर पुत्री बनकर जन्म लीजिए। ऋषि की मांग पर देवी मे उनके इच्छा अनुसार वरदान दे दिया। इसके बाद देवी ऋषि के घर पुत्री बनकर जन्म लिया। उसी वक्त से देवी को उस अवतार को कात्यायनी देवी अवतार कहा जाने लगा।
नदियों के बीच बसा है मां का दरबार
बिहार के खगड़िया जिले के फरकिया इलाके में मां कात्यायनी का दरबार है। यह दरबार नदियों के बीच बसा है। मान्यता है कि मां भगवती की दांयी भूजा आज भी इस मंदिर में मौजूद है। यह मंदिर धमारा घाट रेलवे स्टेशन के पास स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मंदिर की चर्चा स्कंदपुराण में भी की गई है। स्कंदपुराण के अनुसार, कालांतर में कात्यायन ऋषि कोसी तट पर रहते थे और स्नान ध्यान करके मां भगवती की आराधना करते थे। यहीं पर मां भगवती ने उन्हें दर्शन दिया था।