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Vat Savitri Vrat 2026 : वट सावित्री व्रत कब है 16 या 17 मई? जानें सही तारीख, पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Vat Savitri Vrat 2026 Kab Hai : वट सावित्री व्रत 2026 की तैयारियों में जुटी सुहागिनों के लिए यह साल खुशियों की सौगात लेकर आ रहा है। इस बार का व्रत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ग्रहों का एक ऐसा अद्भुत मेल है जो सदियों में कभी-कभार ही देखने को मिलता है।

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भारत

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Manoj Vashisth

Apr 23, 2026

Vat Savitri Vrat 2026 Date

Vat Savitri Vrat 2026 Date : वट सावित्री व्रत 2026 सही तारीख और समय (फोटो सोर्स: AI@Gemini)

Vat Savitri Vrat 2026 Date : हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का अपना खास महत्व है, खासकर सुहागिनों के लिए ज्येष्ठ महीने की अमावस्या पर इस व्रत को रखना पति की लंबी उम्र और शादी में सुख-शांति के लिए किया जाता है। 2026 में ये व्रत और भी खास हो गया है इस बार अमावस्या शनि के दिन पड़ रही है, जो बहुत दुर्लभ योग है। इस वजह से इसका आध्यात्मिक प्रभाव और भी बढ़ जाता है।

कब करना है व्रत: तारीख और सही समय

2026 में वट सावित्री व्रत 16 मई को, शनिवार के दिन रखा जाएगा। शनिवार होने की वजह से शनि देव की कृपा का भी लाभ मिलेगा।

विवरणसमय
अमावस्या प्रारंभ16 मई, सुबह 05:11 बजे
अमावस्या समाप्त17 मई, रात 01:30 बजे
पूजा का शुभ समयसुबह 07:15 से 10:45 बजे
अभिजीत मुहूर्तसुबह 11:50 से 12:45 बजे
राहुकाल (अशुभ समय)सुबह 08:54 से 10:36 बजे

बरगद का पेड़ ही क्यों चुनें?

शास्त्रों के मुताबिक, बरगद के पेड़ में ब्रह्मा उसकी जड़ में विष्णु तने में और शिव उसकी शाखाओं में बसे हैं. वैज्ञानिक नजरिए से भी देखें तो बरगद सबसे ज्यादा ऑक्सीजन देने वाला पेड़ है और बहुत लंबी उम्र वाले पेड़ों में गिना जाता है। यही वजह है, महिलाएं इसे अपने सुहाग की अटूट लंबी उम्र का प्रतीक मानती हैं।

पूजा की सरल और सही विधि

व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और लाल या पीले रंग के कपड़े पहनें। 16 श्रृंगार जरूर करें।

  • थाली में भीगे हुए चने, फल, मिठाई, धूप–दीप और कच्चा सूत रखें
  • बरगद की जड़ में जल चढ़ाएं और चंदन का तिलक लगाएं
  • कच्चा सूत हाथ में लेकर पेड़ के चारों तरफ 7, 11 या 108 बार घूमें
  • पूजा के बाद बांस का पंखा और सुहाग की चीजें दान करें यह बहुत शुभ माना जाता है

सावित्री की वो चतुराई, जिससे यमराज भी हार गए

यह व्रत उस महान कथा की याद दिलाता है जिसमें राजकुमारी सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज के चंगुल से छुड़ा लिए थे। जब यमराज सत्यवान को ले जाने लगे, तो सावित्री उनके पीछे चल दीं। उनकी बुद्धिमानी से खुश होकर यमराज ने उन्हें तीन वरदान दिए। सावित्री ने चतुराई से 100 पुत्रों की माता होने का वरदान मांग लिया। वचन की रक्षा के लिए यमराज को सत्यवान के प्राण लौटाने पड़े। यह चमत्कार एक वट वृक्ष के नीचे ही हुआ था।

2026 का खास शनि उपाय

इस बार अमावस्या शनिवार को है, तो शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे पितृ दोष शांत होता है और पति के करियर या बिजनेस की मुश्किलें हटती हैं।

क्या न करें?

  • इस दिन सफेद या काले कपड़े न पहनें
  • पूजा के दौरान बरगद की टहनियों को नुकसान न पहुंचाएं
  • मन में किसी के लिए बुरा भाव या द्वेष न रखें
  • व्रत का असर तब ज्यादा होता है जब आप सास या घर की बुजुर्ग महिलाओं का आशीर्वाद लें। बड़ों की दुआ से ही किस्मत का दरवाजा खुलता

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।