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Ekadashi May 2026 Calendar: मई 2026 में आ रही हैं 2 बड़ी एकादशी, जान लें तारीख, पारण समय और खास नियम

Ekadashi May 2026 Calendar: मई 2026 में अपरा और पद्मिनी एकादशी कब है? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पारण समय, पूजा विधि, व्रत के नियम और धार्मिक महत्व। पूरा एकादशी कैलेंडर यहाँ देखें।

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भारत

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Manoj Vashisth

Apr 30, 2026

Ekadashi May 2026 Calendar

Ekadashi May 2026 Calendar : मई 2026 में बरसेगी श्रीहरि की कृपा! नोट कर लें अपरा और पद्मिनी एकादशी की डेट

Ekadashi May 2026 Calendar: हिंदू धर्म में अगर किसी व्रत को व्रतों का राजा कहा गया है, तो वह है एकादशी। मान्यता है कि जो व्यक्ति साल भर की सभी एकादशियों का नियमपूर्वक पालन करता है, उसके लिए बैकुंठ के द्वार खुल जाते हैं। साल 2026 का मई महीना आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत खास होने वाला है, क्योंकि इस महीने दो अत्यंत प्रभावशाली एकादशियां आ रही हैं अपरा और पद्मिनी।

मई 2026 का एकादशी कैलेंडर: तारीख और समय | Ekadashi May 2026 Calendar:

मई के महीने में आपको भगवान विष्णु की भक्ति के दो बड़े अवसर मिलेंगे। अपनी डायरी में ये तारीखें अभी नोट कर लें:

एकादशी का नामव्रत की तारीखपारण (व्रत खोलने) की तारीखपारण का समय
अपरा एकादशी13 मई 2026, बुधवार14 मई 2026सुबह 05:31 से 08:14
पद्मिनी एकादशी27 मई 2026, बुधवार28 मई 2026सुबह 05:25 से 07:56

इन एकादशियों का महत्व क्या है?

अपरा एकादशी

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, अपरा यानी जिसका कोई पार न हो। यह एकादशी अपार पुण्य देने वाली मानी गई है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से अनजाने में हुए बड़े से बड़े पाप भी कट जाते हैं और व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान मिलता है।

पद्मिनी एकादशी

साल 2026 में पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) का संयोग बन सकता है, और अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है। यह दुर्लभ एकादशी है जो कई वर्षों में एक बार आती है। इसे करने से संतान सुख और वैवाहिक जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

पूजा की सरल विधि: ऐसे प्रसन्न होंगे श्रीहरि

सिर्फ भूखा रहना व्रत नहीं है, बल्कि सही विधि से पूजा करना ही असली फल देता है:

संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

तुलसी का महत्व: भगवान विष्णु को तुलसी दल (पत्ता) सबसे प्रिय है, लेकिन याद रखें कि एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए। एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख लें।

मंत्र जाप: पूरे दिन मन ही मन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते रहें।

क्या न खाएं: एकादशी पर चावल खाना वर्जित है। माना जाता है कि इस दिन चावल खाना रेंगने वाले जीव के मांस के समान होता है। आप फल, दूध और कुट्टू का आटा जैसे फलाहार ले सकते हैं।

दान-पुण्य: अगले दिन (द्वादशी) व्रत खोलने से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन या दान जरूर दें।

खास बात: क्यों है यह व्रत विज्ञान और धर्म का संगम?

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में एकादशी का व्रत केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि डिटॉक्स (Detox) का भी बेहतरीन तरीका है। महीने में दो बार अनाज का त्याग करने से हमारे पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर की अशुद्धियां बाहर निकल जाती हैं।

काम की बात

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन क्रोध और निंदा (बुराई) से बचना चाहिए। यदि आप शारीरिक रूप से व्रत रखने में असमर्थ हैं, तो भी इस दिन सात्विक भोजन करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें इसका भी बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।