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Buddha Purnima 2026 : रवि योग के शुभ संयोग में मनेगी बुद्ध जयंती, विष्णु के 9वें अवतार का मिलेगा आशीर्वाद

Buddha Purnima 2026 : बुद्ध पूर्णिमा 2026 (1 मई) रवि योग के शुभ संयोग में मनाई जाएगी। जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, वैशाख पूर्णिमा का महत्व, भगवान बुद्ध और विष्णु के 9वें अवतार से जुड़ी खास बातें।

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भारत

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Manoj Vashisth

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Anish Vyas

Apr 29, 2026

Buddha Purnima 2026

Buddha Purnima 2026 : बुद्ध पूर्णिमा 2026 (1 मई) रवि योग के शुभ संयोग में मनाई जाएगी। (फोटो सोर्स: AI@Gemini)

Buddha Purnima 2026 : हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि बहुत पुण्यदायी मानी गई है। वैशाख महीने की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा और बुद्ध जयंती के नाम से जाना जाता है। इस बार बुद्ध पूर्णिमा का पर्व 1 मई को मनाई जाएगा। यह पर्व हिंदू और बौद्ध दोनों ही धर्मों के अनुयायी मनाते हैं। बुद्ध पूर्णिमा को बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति के दिन के रूप में देखा जाता है और और इसी दिन उनका महानिर्वाण भी हुआ था। वहीं हिंदू मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने अपना 9 वां अवतार बुद्ध के रूप में लिया था।

ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि हर महीने शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के अगले दिन पूर्णिमा मनाई जाती है। इस प्रकार 1 मई को वैशाख पूर्णिमा है। इसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। शास्त्रों में निहित है कि वैशाख पूर्णिमा तिथि पर भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। अतः हर वर्ष वैशाख पूर्णिमा तिथि पर बुद्ध जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान बुद्ध की पूजा-उपासना की जाती है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन रवि योग है।

वैशाख पूर्णिमा 1 मई 2026 को मनाई जाएगी | Vaishakh Purnima 1 May 2026

वैशाख पूर्णिमा का हिंदुओं में बेहद महत्व है। इस दिन लोग सत्यनारायण कथा चंद्रमा को अर्घ्य और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। ऐसा कहा जाता है जो लोग इस पवित्र दिन का उपवास रखते हैं उन्हें दिव्य शक्तियां प्राप्त होती हैं साथ ही उनके घर पर माता लक्ष्मी का वास सदैव के लिए हो जाता है। शास्त्रों में निहित है कि वैशाख पूर्णिमा तिथि पर भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। इसी दिन ज्ञान की प्राप्ति और परिनिर्वाण हुआ था।

अतः हर वर्ष वैशाख पूर्णिमा तिथि पर बुद्ध जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान बुद्ध की पूजा-उपासना की जाती है। इस अवसर पर लोग गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। साथ ही पूजा-पाठ कर दान-पुण्य करते हैं। बुद्ध पूर्णिमा को गौतम बुद्ध की जयंती के रूप में मनाया जाता है।

भगवान के तीन अवतार

इन तीन दिनों में भगवान विष्णु के तीन अवतार अवतरित हुए हैं। त्रयोदशी को नृसिंह जयंती, चतुर्दशी को कूर्म जयंती तथा पूर्णिमा को बुद्ध जयंती (बुद्ध पूर्णिमा)। इसलिए वैशाख के अंतिम दिनों में स्नान, दान, पूजन जरूर करना चाहिए। देवताओं ने कहा कि वैशाख की ये तीन शुभ तिथियां इंसानों के पाप का नाश करने वाली रहेंगी। इनके शुभ प्रभाव से ही उन्हें पुत्र-पौत्र और परिवार का सुख मिलेगा। इन्हीं के प्रभाव से समृद्धि बढ़ेगी। स्कंद पुराण में कहा गया है कि जो पूरे वैशाख में सुबह जल्दी तीर्थ स्नान न कर सका हो, वो सिर्फ इन तिथियों में सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदियों के जल से नहा ले तो उसे पूरे महीने का पुण्य फल मिल जाता है।

वैशाख पूर्णिमा पर क्या करें

वैशाख मास की आखिरी तीन तिथियों में गीता पाठ करने से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है। इन तीनों दिनों में श्रीविष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से कभी न खत्म होने वाला अनंत गुना पुण्य फल मिलता है। वैशाख पूर्णिमा को हजार नामों से भगवान विष्णु का दूध और जल से अभिषेक करता है उसे बैकुण्ठ धाम मिलता है। वैशाख के आखिरी तीन दिनों में श्रीमद् भागवत सुनने से जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की है परंपरा

बुद्ध पूर्णिमा के दिन बोधगया में दुनियाभर से बौद्ध धर्म मानने वाले आते हैं और बोधि वृक्ष की पूजा करते हैं। वैशाख पूर्णिमा पर पवित्र नदी के जल से स्नान के बाद घर में भगवान सत्यनारायण की पूजा और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। माना जाता है कि चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है और सुख-समृद्धि का वास होता है

वैशाख पूर्णिमा

विवरण (Description)तिथि / समय (Date & Time)
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ30 अप्रैल 2026, रात 9:13 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त1 मई 2026, रात 10:53 बजे
उदया तिथि के अनुसार पर्व तिथि1 मई 2026 (शुक्रवार)
पर्व का नामवैशाख पूर्णिमा

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि वैशाख मास की पूर्णिमा को वैशाखी पूर्णिमा,पीपल पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार वैशाख पूर्णिमा सभी में श्रेष्ठ मानी गई है। प्रत्येक माह की पूर्णिमा जगत के पालनकर्ता श्री हरि विष्णु भगवान को समर्पित होती है। भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना गया है। जिन्हें इसी पावन तिथि के दिन बिहार के पवित्र तीर्थ स्थान बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। वैशाख माह को पवित्र माह माना गया है। इसके चलते हज़ारों श्रद्धालु पवित्र तीर्थ स्थलों में स्नान,दान कर पुण्य अर्जित करते हैं। पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्त्व माना गया है।

वैशाख पूर्णिमा पूजा अनुष्ठान

डा. अनीष व्यास ने बताया कि सुबह जल्दी उठकर गंगा नदी में पवित्र स्नान करें। जो लोग गंगा नदी स्नान के लिए नहीं जा सकते हैं, वे घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाएं। कुछ लोग इस दिन गंगा नदी में पवित्र स्नान के लिए हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य प्रमुख स्थानों पर भी जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि गंगा जल शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करता है। इस दिन लोग भगवान चंद्र को अर्घ्य देते हैं और उनके वैदिक मंत्रों का जाप करते हैं। यह खास दिन दान-पुण्य के लिए भी फलदायी माना जाता है।

पूर्णिमा के दिन ब्राह्मणों को भोजन और वस्त्रों का दान करना चाहिए। इस दिन भक्त सत्यनारायण व्रत रखते हैं, और उनकी पूजा करते हैं। पूर्णिमा का दिन बेहद खास माना जाता है, क्योंकि चंद्रमा की रोशनी सीधे पृथ्वी पर आती है, जिससे घर में समृद्धि और खुशी का वास होता है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन खिलाना चाहिए और वस्त्रों का दान करना चाहिए।