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Narasimha Jayanti 2026 : 30 अप्रैल को मनाई जाएगी नरसिंह जयंती, जानिए शुभ समय और पूजा विधि

Narasimha Jayanti 2026 Date and Time: नरसिंह जयंती 2026 कब है? जानें 30 अप्रैल की तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, कथा और इस दिन का धार्मिक महत्व।

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भारत

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Manoj Vashisth

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Nitika Sharma

Apr 29, 2026

Narasimha Jayanti 2026

Narasimha Jayanti 2026 : नरसिंह जयंती 2026 में कब है और कैसे मनाएं (फोटो सोर्स: AI@Gemini)

Narasimha Jayanti 2026 : हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नृसिंह जयंती (Narasimha Jayanti 2026) का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने नृसिंह रूप में अवतार लिया था। इस अवतार में भगवान का स्वरूप आधे शेर का और आधे मनुष्य का था। भगवान विष्णु ने ये अवतार अपने भक्त प्रह्लाद को बचाने और हिरण्यकश्यिपु का वध करने के लिए लिया था।

ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि यह दिन भगवान विष्णु के उग्र स्वरूप भगवान नरसिंह को समर्पित है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की विजय और भक्तों की रक्षा के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस साल नरसिंह जयंती 30 अप्रैल को मनाई जाएगी, जो हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ती है। नरसिंह जयंती का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है। नरसिंह जयंती बेहद शुभ मानी जाती है।

वैदिक पंचांग के अनुसार, नृसिंह जयंती (Narasimha Jayanti 2026) हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है और यह दिन भगवान विष्णु के उग्र एवं रक्षक स्वरूप भगवान नृसिंह को समर्पित होता है। इस पावन अवसर पर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान नृसिंह की उपासना करने से व्यक्ति को भय से मुक्ति, शत्रुओं पर विजय और नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा प्राप्त होती है। साथ ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद भी मिलता है।

नरसिंह जयंती कब है | Narasimha Jayanti 2026 date

विवरणतिथि और समय
चतुर्दशी तिथि आरंभ29 अप्रैल 2026, सायं 7:51 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त30 अप्रैल 2026, रात्रि 9:12 बजे
उदया तिथि के अनुसार पर्व30 अप्रैल 2026 (गुरुवार)
पर्व का नामनृसिंह जयंती

नरसिंह जयंती पूजा विधि | Narasimha Jayanti puja vidhi

सुबह उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करें और गंगाजल से पवित्र करें। एक वेदी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। भगवान नरसिंह की प्रतिमा स्थापित करें। अगर नरसिंह जी की प्रतिमा न हो तो भगवान विष्णु की तस्वीर भी स्थापित कर सकते हैं। पूजा शुरू करने से पहले व्रत और पूजा का संकल्प लें।

भगवान नरसिंह की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान कराएं। चंदन, कुमकुम, हल्दी और गुलाल आदि चीजें अर्पित करें। उन्हें पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनाएं और पीले फूलों की माला चढ़ाएं। भगवान नरसिंह को फल, मिठाई, विशेष रूप से गुड़ और चना अर्पित करें। पूजा में तुलसी दल जरूर शामिल करें। घी का दीपक जलाएं। भगवान नरसिंह के मंत्रों का जाप करें। अंत में भगवान नरसिंह की आरती करें। पूजा के दौरान हुई गलतियों के लिए माफी मांगे। अपनी क्षमतानुसार गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें।

नरसिंह जयंती के दिन इन मंत्रों का करें जाप | Narasimha Jayanti mantra

  • ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्।।
  • ॐ नृम नरसिंहाय शत्रुबल विदीर्नाय नमः
  • ॐ नृम मलोल नरसिंहाय पूरय-पूरय

नरसिंह जयंती की पौराणिक कथा | Narasimha Jayanti Katha

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार लिया था। उसमें भगवान नरसिंह का आधा शरीर मनुष्य का और आधा शरीर सिंह का था। वे हिरण्यकश्यप के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए दोपहर के समय खंभा फाड़कर प्रकट हुए थे।

उन्होंने घर की दहलीज पर हिरण्यकश्यप को अपने जंघे पर लिटाकर दोनों हाथों के नखों से उसका पेट फाड़ दिया था। हिरण्यकश्यप को वरदान था कि उसे मनुष्य या जानवर, दिन या रात में, अस्त्र या शस्त्र से नहीं मारा जा सकता था। इस वजह श्रीहरि ने सबसे अनोखा स्वरूप नरसिंह का धारण किया था।

नरसिंह जयंती का महत्व | Narasimha Jayanti significance

ऐसी मान्यता है कि नरसिंह जयंती के दिन भगवान नरसिंह की पूजा करने से भक्तों के अंदर का भय दूर होता है। भगवान नरसिंह की कृपा से जीवन में आने वाले संकटों का नाश होता है। वे अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। उनकी पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और लाइफ में आने वाले कष्टों से छुटकारा मिलता है। इसके अलावा नरसिंह जयंती के दिन व्रत रखने और भगवान नरसिंह की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और साथ ही ग्रह-दोष से भी मुक्ति मिलती है।

Frequently Asked Questions