
Vaishakh Amavasya 2026 Date : वैशाख अमावस्या 2026 (फोटो सोर्स: Gemini AI)
Vaishakh Amavasya 2026 Date and Time : वैशाख अमावस्या हिंदू धर्म में पितरों की पूजा, तर्पण और दान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन किए गए स्नान, दान और श्राद्ध से न केवल पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति भी आती है।
एस्ट्रोलॉजर डॉ शरद शर्मा ने कहा, अगर बात करें कि किस तिथि में अमावस्या (Vaishakh Amavasya) का व्रत रखना सही रहेगा, तो देखिए 16 अप्रैल गुरुवार को सूर्यास्त के बाद और लगभग रात में ही अमावस्या की तिथि लग रही है , इसलिए गुरुवार को अमावस्या संबंधी कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए, न ही व्रत रखना चाहिए।
अगले दिन, 17 अप्रैल शुक्रवार को क्योंकि सूर्योदय व्यापिनी ब्रह्म मुहूर्त व्यापिनी अमावस्या रहेगी और शाम को सूर्यास्त से बस कुछ ही देर पहले अमावस्या तिथि समाप्त हो रही है, इसलिए अमावस्या का चाहे व्रत हो या स्नान-दान, पितृ तर्पण हो, श्राद्ध आदि कार्य वे 17 अप्रैल, दिन शुक्रवार को ही करना सही रहेगा, और इसी दिन अमावस्या का व्रत भी रखा जाएगा।
17 अप्रैल शुक्रवार को ब्रह्म मुहूर्त, जो कि सुबह स्नान या मंत्र-जाप और पूजा के लिए उत्तम है, सुबह 4:31 से 5:19 तक रहेगा। सूर्योदय होगा सुबह 6:08 पर; सूर्यास्त होगा शाम 6:44 पर। तो सूर्योदय तक सुबह स्नान करके आप पूजा-पाठ कर सकते हैं।
अमावस्या तिथि के दिन रेवती नक्षत्र दोपहर 12:02 तक रहेगा। इसके बाद अश्विनी नक्षत्र प्रारंभ होगा। राहु काल सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:01 से 12:51 तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त में आप अपने पितरों के नाम से कुछ भी दान इत्यादि कर सकते हैं; कोई खास उपाय यदि करना चाहते हों तो कर सकते हैं।
सुबह 4:47 से लेकर 5:54 तक। शाम की पूजा आप शाम 6:47 से लेकर 7:54 के बीच में कर सकते हैं। जब आप शाम की पूजा कर रहे हों, साथ ही दीपदान भी कर सकते हैं। अमावस्या तिथि पर दीपदान करने की विशेष परंपरा है। पितरों के निमित्त जो भी कार्य आप इस दिन करना चाहते हों, यदि वे शुभ मुहूर्त में किए जाएँ तो उनका पुण्य कहीं अधिक प्राप्त होता है।
अमावस्या के दिन राहु काल के समय में राहु-केतु ग्रह से संबंधित चीजों का दान करना चाहिए। वहीं पितरों के निमित्त जलदान या तर्पण आदि कार्य आप सुबह सूर्योदय से लेकर 9:15 के बीच में कर सकते हैं। या फिर दोपहर में 12:01 से 12:51 के बीच में पितरों के निमित्त पिंडदान या श्राद्ध आदि कार्य कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या का यह दिन पितृ-कार्य के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना, जैसे गंगा स्नान, बहुत शुभ होता है। इससे पापों का नाश होता है और मन को शुद्धि मिलती है।
गर्मी के मौसम की शुरुआत होने के कारण इस दिन सत्तू, पानी से भरा हुआ घड़ा या मटका और पंखे जैसी वस्तुओं का दान करना बहुत पुण्यदाई माना जाता है। इस दिन लोग सात्विक भोजन करते हैं और सत्तू, तिल, गुड़ और जल से तर्पण करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए पितृ कार्यों से घर में सुख, शांति, समृद्धि और मानसिक संतोष बना रहता है।
अमावस्या तिथि के दिन दीपदान करने की परंपरा भी है और साथ ही पितरों के निमित्त दीप दान किया जाता है। पीपल के पेड़ की पूजा और शनिदेव की पूजा का भी इस दिन विधान है। अमावस्या के दिन स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल (रंग), चंदन और पुष्प डालकर सूर्य भगवान को अर्घ देकर, फिर दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके पितरों के नाम से जल और काले तिल अर्पित करने चाहिए। ओम पितृभ्य नमः मंत्र का जाप करना चाहिए। मिट्टी के कलश में जल भरकर उसके ऊपर सत्तू का पात्र रखकर दान करना शुभ माना जाता है।
अमावस्या तिथि के दिन नियमों का पालन करने वाले श्रद्धालुओं को दूसरे के घर का अन्न या किसी भी प्रकार का भोजन नहीं करना चाहिए, और इस दिन लहसुन-प्याज से बना हुआ भोजन या तामसिक भोजन का त्याग करना चाहिए।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।
Published on:
14 Apr 2026 01:47 pm
बड़ी खबरें
View Allधर्म और अध्यात्म
धर्म/ज्योतिष
ट्रेंडिंग
