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अधिक मास शिवरात्रि 2026: मिट्टी के शिवलिंग की पूजा का महत्व और सही विधि

Adhik Maas Shivratri 2026: जून 2026 में पड़ रही अधिक मासिक शिवरात्रि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास मानी जा रही है। जानिए पार्थिव शिवलिंग पूजा का महत्व, व्रत नियम और सरल पूजा विधि।

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भारत

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Manoj Vashisth

May 28, 2026

Adhik Maas Shivratri 2026, Parthiv Shivling Puja

Adhik Maas Shivratri 2026 : 3 साल बाद अधिक मास शिवरात्रि: राहु-केतु दोष से राहत दिलाएगी यह पूजा (फोटो सोर्स: shrimahakaleshwar.mp.gov.in)

Adhik Maas Shivratri 2026: हिंदू सनातन धर्म में हर साल एक सबसे बड़ा और पवित्र महीना (Adhik Maas Shivratri 2026) आता है, जिसे लोग अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जानते हैं। यह खास महीना ज्योतिष के हिसाब से करीब तीन साल में एक बार पड़ता है। इस बार जून 2026 में, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर वह अनोखी शिवरात्रि (Adhik Maas Shivratri 2026) आने वाली है, जिसका महत्व आम दिनों से हजार गुना ज्यादा बताया गया है। लोगों का मानना है कि इस शुभ मौके पर पूरे मन से भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की सारी परेशानियां खुद-ब-खुद दूर हो जाती हैं।

Adhik Maas Shivratri 2026 : पार्थिव शिवलिंग पूजा का महत्व

पुराणों के मुताबिक, इस दौरान मिट्टी से शिवलिंग (Parthiv Shivling Puja) बनाकर उसकी पूजा और जलाभिषेक करने का खास महत्व है। कहते हैं, जो पूरी श्रद्धा से ऐसा करता है, उसके पुराने-से-पुराने शारीरिक रोग और दिल-दमाग के तनाव खत्म हो सकते हैं। यह व्रत मन और शरीर दोनों को भीतर तक शुद्ध कर देता है और इंसान में एक जबरदस्त संकल्पशक्ति आ जाती है। कुंवारी कन्याओं के लिए यह व्रत किसी वरदान से कम नहीं, क्योंकि इससे शादी में आ रही अड़चनें दूर हो सकती हैं और अच्छा जीवनसाथी मिलता है।

राहु-केतु दोष और ज्योतिषीय मान्यता

अगर ज्योतिष की नजर से देखें, तो इस साल की अधिक मासिक शिवरात्रि (Adhik Maas Shivratri 2026) बहुत खास मानी गई है। ज्योतिषियों के मुताबिक, इस दिन शिवजी की पूजा करने से कुंडली के राहु-केतु के बुरे असर कम होने की मान्यता है। जिनकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या चंद्र की कमजोरी से विष दोष बन रहा है उनके लिए भी यह व्रत राहत पहुंचाता है। जो लोग पैसों की कमी या कारोबार के नुकसान से परेशान हैं, उनके लिए भी यह दिन सौभाग्य लाने वाला साबित हो सकता है।

अधिक मास में क्या नहीं करना चाहिए

व्रत के दौरान किसी का भी अपमान न करें, न ही कटु वचन बोलें। चूंकि यह मलमास है, इसलिए इस दौरान विवाह या कोई भी अन्य मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित होता है। इस दिन ध्यान और योग करना सर्वोत्तम फल देता है।

अधिक मास हर 3 साल में क्यों आता है

वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखा जाए, तो चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है और सौर वर्ष 365 दिनों का। इन दोनों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है। इसी 11 दिन के अंतर को पाटने और दोनों कैलेंडरों में संतुलन बनाने के लिए हर तीसरे साल में 1 महीना अतिरिक्त जोड़ दिया जाता है, जिसे अधिक मास कहते हैं। चूंकि इस महीने के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं और शिवरात्रि के स्वामी भगवान शिव हैं, इसलिए इस दिन 'हरि-हर' (विष्णु और शिव) का संयुक्त आशीर्वाद धरती पर बरसता है।

अधिक मास शिवरात्रि पूजा विधि

यदि आप इस महासंयोग का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं, तो शास्त्रों में बताई गई इस प्रामाणिक विधि से पूजा करें:

सुबह का संकल्प: चतुर्दशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इस दिन सफेद रंग के साफ कपड़े पहनना अत्यंत शुभ और सकारात्मक ऊर्जा देने वाला माना जाता है।

दीपक की रोशनी: अपने घर के मंदिर को साफ करें। भगवान शिव की मूर्ति स्थापित कर एक दीपक उनके समक्ष और एक मुख्य शिवलिंग के पास जरूर जलाएं। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। आप अपनी श्रद्धानुसार फलाहार या निर्जला व्रत रख सकते हैं।

प्रदोष काल का महत्व: दिनभर व्रत रखने के बाद, शाम के समय (प्रदोष काल में) शिव मंदिर जाएं। यदि मंदिर जाना संभव न हो, तो घर पर ही साफ स्थान पर शिवलिंग स्थापित करें।

पंचामृत अभिषेक: शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल और सबसे महत्वपूर्ण बेलपत्र अर्पित करते हुए पंचामृत से अभिषेक करें। इस दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का निरंतर जाप करते रहें। शाम की पूजा के बाद भक्तों में प्रसाद जरूर बांटें।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।