बेंगलूरु अहंकार मनुष्य को पतन की ओर ले जाने वाला सबसे बड़ा अवगुण है। व्यक्ति के पास धन, ज्ञान, बल, प्रतिष्ठा सब कुछ हो परन्तु यदि विनय नहीं है तो वह समाज में सच्चा सम्मान प्राप्त नहीं कर सकता। जीवन में मनुष्य का वास्तविक सौंदर्य उसके व्यवहार और विनम्रता में निहित है। विनय वह शक्ति […]
बेंगलूरु
अहंकार मनुष्य को पतन की ओर ले जाने वाला सबसे बड़ा अवगुण है। व्यक्ति के पास धन, ज्ञान, बल, प्रतिष्ठा सब कुछ हो परन्तु यदि विनय नहीं है तो वह समाज में सच्चा सम्मान प्राप्त नहीं कर सकता। जीवन में मनुष्य का वास्तविक सौंदर्य उसके व्यवहार और विनम्रता में निहित है। विनय वह शक्ति है जो मन के अहंकार को मिटाकर जीवन में शान्ति और सद्भावना का संचार करती है।
यह बातें राजाजीनगर स्थानक में आयोजित धर्मसभा में साध्वी कंचनकंवर के सान्निध्य में साध्वी अणिमाश्री ने कही। उन्होंने विनय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विनय धर्म का मूल तत्व है। मनुष्य जीवन को सार्थक बनाने के लिए विनम्रता को जीवन में धारण करना अत्यन्त आवश्यक है। रावण के पास अपार धन, असाधारण विद्या और शक्ति थी, परन्तु अहंकार ने उसे विनाश की ओर धकेल दिया। ज्ञान और वैभव होते हुए भी वह इतिहास में सम्मानित नहीं, बल्कि पतन का प्रतीक बनकर रह गया। इसी प्रकार सिकंदर ने पूरी दुनिया जीत ली, परन्तु मृत्यु के समय उसके आदेश पर दोनों हाथ खाली बाहर रखे गए, ताकि संसार जान सके कि अपार सम्पत्ति और सत्ता भी मनुष्य के साथ नहीं जाती। जिस प्रकार फलदार वृक्ष सदैव झुकता है, उसी प्रकार महान व्यक्ति विनम्रता से ही पहचाना जाता है।साध्वी कंचन कंवर ने कहा कि विनय, आत्मा की उन्नति का मार्ग है। मोक्ष जाने का सरलतम मार्ग धर्म का मार्ग है। विनय गुण को ग्रहण करो। मौके पर श्रीरामपुरम संघ के निवर्तमान अध्यक्ष शांतिलाल खिंवेसरा, गणेशमल गुगलिया आदि उपस्थित रहे। साध्वी मंडल का मंगलवार को श्रीरामपुरम की ओर विहार होगा। आभार ज्ञापन अध्यक्ष प्रकाश चानोदिया ने और संचालन मंत्री नेमीचंद दलाल ने किया।