Wednesday (बुधवार) poverty (दरिद्रता) away mantra (मंत्र) - The accent of this mantra will make the whole family's poverty away. ganesh mantra के जप से एक साथ अनेक मनोकामनाएं पूर होने लगती है।
रिद्दि सिद्धि के देवता भगवान श्री गणेश जो सभी देवों में प्रथम पूजनीय है, इनकी प्रथम पूजा के बिना कोई भी शुभ कार्य पूरे नहीं माने जाते। अगर किसी व्यक्ति या उसके पूरे में धन का अभाव हो, दरिद्रता घर में निवास कर रही हो तो बुधवार के दिन या सप्ताह के सातों दिन परिवार के सभी सदस्य इन गणेश मंत्रों में से किसी भी एक मंत्र का जप रोज 108 बार या इससे अधिक करें तो कुछ ही दिनों में घर परिवार की दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जायेगी।
1- दरिद्रता से मुक्ति के लिए इन दो मंत्रों का जप करें-
मंत्र
।। ॐ गं लक्ष्म्यौ आगच्छ आगच्छ फट्।।
।। ॐ श्री गणेश ऋण छिन्धि वरेण्य हुं नमः फट।।
2- यह हरिद्रा गणेश साधना का चमत्कारी मंत्र है, इसके जप से सर्वत्र मंगल ही मंगल होता है।
मंत्र
।। ॐ हुं गं ग्लौं हरिद्रा गणपत्ये वरद वरद सर्वजन हृदये स्तम्भय स्वाहा ।।
3- - मुकदमे में सफलता प्राप्त करने के लिए इस मंत्र का जप करें।
मंत्र
।। ॐ वर वरदाय विजय गणपतये नमः ।।
4- वाद-विवाद, कोर्ट कचहरी में विजय प्राप्ति के लिए एवं शत्रु भय से छुटकारा पाने के लिए इस मंत्र को जपें।
मंत्र
।। ॐ गं गणपतये सर्वविघ्न हराय सर्वाय सर्वगुरवे लम्बोदराय ह्रीं गं नमः ।।
5- इस मंत्र के जप से यात्रा में सफलता मिलती है।
मंत्र
।। ॐ नमः सिद्धिविनायकाय सर्वकार्यकर्त्रे सर्वविघ्न प्रशमनाय सर्व राज्य वश्य कारनाय सर्वजन सर्व स्त्री पुरुषाकर्षणाय श्री ॐ स्वाहा।।
6- इस मंत्र के जप से एक साथ अनेक मनोकामनाएं पूर्ण होने लगती है।
मंत्र
।। ॐ अन्तरिक्षाय स्वाहा ।।
7- इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से गृह कलेश दूर होता है एवं घर में सुखशान्ति बनी रहती है।
मंत्र
।। ॐ ग्लौं गं गणपतये नमः।।
8- व्यापार से सम्बन्धित बाधाएं एवं परेशानियां निवारण एवं व्यापर में निरंतर उन्नति हेतु इस मंत्र का जप करें।
मंत्र
।। ॐ गणेश महालक्ष्म्यै नमः ।।
9- भयानक असाध्य रोगों से परेशानी होने पर, उचित ईलाज कराने पर भी लाभ प्राप्त नहीं हो रहा हो, तो पूर्ण विश्वास सें इस मंत्र का जप करने से या किसी साधक से करवाने पर रोगी धीरे-धीरे रोगी रोग मुक्त हो जाता है ।
मंत्र
। । ॐ गं रोग मुक्तये फट् ।।
10- इस मंत्र का जप करने से उत्तम संतान की प्राप्ति होती है।
मंत्र
।। गं गणपत्ये पुत्र वरदाय नमः।।
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