धौलपुर

Dholpur: कृषि उपज मण्डी ने 17 दुकानों सहित 47 भूखंडों के आवंटन किए निरस्त, लोगों ने लगाए आरोप

छह सालों की लंबी प्रक्रिया और दुकानों का आवंटन होने के बाद भी मण्डी प्रशासन ने इन आवेदनकर्ताओं को दुकानों और भूखण्डों का मालिकाना हक नहीं दिया। तो वहीं अब दुकानों के आवंटन को प्रक्रियात्मक त्रुटि का हवाला देकर रद कर दिया गया,
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कृषि उपज मंडी कार्यालय

धौलपुर. गत वर्ष कृषि उपज मण्डी की 17 दुकानों सहित भूखण्ड आवंटन प्रक्रिया रद होने से हितग्राही अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। मण्डी प्रशासन ने आवंटन प्रक्रिया रद करने का आधार प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण बताया है। तो वहीं दुकानों के आवंटन में भ्रष्टाचार का भी मामला सामने आ रहा है। जहां दुकानों के अलॉटमेंट के नाम पर आवेदनकर्ताओं से दो-दो लाख रुपए मांगे हैं। मण्डी प्रशासन अब इन दुकानों और भूखण्डों का नए सिरे से आवंटन प्रक्रिया जारी करेगा।

कृषि उपज मण्डी समिति ने मण्डी प्रांगण स्थित 17 दुकानों और भूखण्डों को आरक्षण प्रक्रिया के तहत आवंटन करने 2021में विज्ञप्ति जारी की थी। जिसमें शहरी महिला कृषक, मण्डी लाइसेंस वालों को प्राथमिकता दी गई। जिसके बाद दुकानों का आवंटन 26 नवंबर 2025 में लॉटरी के माध्यम से किया गया था। आवंटन प्रक्रिया के तहत जिला प्रशासन प्रतिनिधि, उपखण्ड अधिकारी, निदेशक प्रतिनिधि और स्थानीय मण्डी सचिव की मौजूदगी में की गई थी। प्रक्रिया में आवंटन नीति प्रावधान के अनुसार प्रभावी डीएलसी दर 75 हजार वर्गमीटर रुपए निर्धारित भी की गई थी, लेकिन पिछले छह सालों की लंबी प्रक्रिया और दुकानों का आवंटन होने के बाद भी मण्डी प्रशासन ने इन आवेदनकर्ताओं को दुकानों और भूखण्डों का मालिकाना हक नहीं दिया। तो वहीं अब दुकानों के आवंटन को प्रक्रियात्मक त्रुटि का हवाला देकर रद कर दिया गया, जबकि लोगों का कहना है कि दुकानों के आवंटन के दौरान मण्डी निदेशक दो बार अनुमोदन कर चुके थे और उसमें सब सही बताया गया था, और अगर प्रक्रियात्मक त्रुटि होती तो तब यह सामने क्यों नहीं आई और तब इन दुकानों की आवंटन प्रक्रिया को रद क्यों नहीं किया गया, यह समझ से परे है। दुकानों का आवंटन होने के बाद भी लेकिन उसके बाद भी आवेदनकर्ताओं को दुकानों और भूखण्डों का कब्जा नहीं दिया गया।

कब्जा देने के एवज में मांगे दो-दो लाख

दुकानों के आवंटन को लेकर अब भ्रष्टाचार का मामला भी सामने आने लगा है। लोगों ने आरोप लगाया है कि शुरुआत से ही दुकानों के आवंटन प्रक्रिया को लंबा खींचा गया और लोगों को लॉटरी प्रक्रिया में नाम खुलने के बाद दुकानों का मालिकाना हक नहीं दिया गया। लोगों ने आरोप लगाया कि अब उनसे दुकानों का कब्जा देने के एवज में दो-दो लाख रुपए मांगे जा रहे हैं, रुपए नहीं देने के एवज में दुकानों की आवंटन प्रक्रिया को रद करा दिया गया। लोगों का कहना है कि जब नियमानुसार दुकान और भूखण्ड उन्हें आवंटित हो चुके हैं तो अब रुपए क्यूं? यह तो भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने जैसा है।

तीन बार जारी की आवंटन के लिए विज्ञप्ति

देखा जाएतो मामला समझ से परे है। 2021 में जहां दुकानों के आवंटन को लेकर निविदा जारी की गई थी। जिसके बाद आवेदनकर्ताओं ने आवेदन किए। इसके बाद मण्डी प्रशासन ने फिर 2022 और 2023 में दो बार और दुकानों के आवंटन को लेकर विज्ञप्ति और जारी की गई और आवंटन प्रक्रिया को लंबा खींचा गया। 2025 के अंत तक आकर दुकानों का आवंटन किया गया। जानकारी के अनुसार विज्ञप्ति जारी होने के बाद इन छह सालों में दो आवेदनकर्ताओं की मौत तक हो चुकी है। उसके बाद भी आवेदनकर्ताओं को दुकानों का मालिकाना हक जारी नहीं किया गया और अब प्रक्रिया को त्रुटिपूर्ण करार देते हुए आवंटन को ही रद कर दिया गया।

मुख्यंत्री और राष्ट्रपति तक की शिकायत

कृषि उपज मण्डी की दुकानों और भूखण्डों के आवंटन में भ्रष्टाचार का मामला अब मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक पहुंच चुका है। मामले को लेकर दोनों ही जगहों पर दुकानों के कब्जा देने के एवज में दो-दो लाख रुपए की रिश्वत लेने की शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता ने बताया कि जब दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया नियमानुसार हुई है तो फिर प्रक्रिया में त्रुटि कैसी और अब दो-दो लाख रुपए किस लिए। शिकायतकर्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति के लिए की गई शिकायत के बाद दोनों ही जगहों से उन्हें मामले में कार्रवाई करने का भरोसा दिया गया है।

निदेशालय ने पूरी प्रक्रिया को देखा जिसमें कुछ खामियां पाई गई हैं जिस कारण ही दुकानों के आवंटन को निरस्त किया गया है। दुकानों की आवंटन कार्रवाई पूर्ण हो गई तो रुपए मांगने का क्या औचित्य।

-कुशल शर्मा, कृषि उपज मण्डी सचिव धौलपुर

Updated on:
07 Jul 2026 06:33 pm
Published on:
07 Jul 2026 06:33 pm