धौलपुर. जिले में कुपोषण से शिकार बच्चों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पिछले कुछ सालों में कुपोषण के मामलों में गिरावट जरूर देखने को मिली है, लेकिन जनवरी तक अति कुपोषण के 489 और कुपोषण से 2500 बच्चों का आंकड़ा दर्ज किया गया था।
धौलपुर. जिले में कुपोषण से शिकार बच्चों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पिछले कुछ सालों में कुपोषण के मामलों में गिरावट जरूर देखने को मिली है, लेकिन जनवरी तक अति कुपोषण के 489 और कुपोषण से 2500 बच्चों का आंकड़ा दर्ज किया गया था।
महिला एवं बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग की लाख कोशिशों के बावजूद भी जिले में कुपोषण के दंश को खत्म नहीं किया जा पा रहा।कुपोषण के दंश से जिले के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्र आज भी जूझ रहे हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए महिला बाल विकास विभाग और जिला प्रशासन ने सुपोषित बचपन जैसे नवाचारों और विशेष अभियानों की शुरुआत की थी, ताकि बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्म और पौष्टिक आहार फोर्टिफाइड मूंग दाल मिल सके, लेकिन सरकारों को लाखों करोड़ों खर्च करने के बावजूद भी कुपोषण पर जीत नामुमकिन सी लग रही है। हां सरकारों के प्रयासों से कुपोषण की रफ्तार को थामने में जरूर कामयाबी मिली है, लेकिन अभी भी जिले के विभिन्न हिस्सों में गत वर्ष यानी 2025 तक 554 बच्चे अति कुपोषण के शिकार थे, तो वहीं 3159 बच्चे कुपोषण का दंश झेल रहे हैं। देखा जाए तो यह आंकड़ा पिछले तीन सालों में संतोषजनक तो लगता है, लेकिन 9713 बच्चे अभी भी कुपोषण से जूझ रहे हैं, जो कि एक बड़ा आंकड़ा है और वह तब जब कुपोषण को हराने तमाम तरह के कार्यक्रम आयोजित कर लाखों करोड़ों रुपए इसके खात्मे पर बहा दिए गए।
पोषाहार को लेकर आ चुकी हैं शिकायतें
अशिक्षा, जागरूकता का अभाव के कारण कुपोषण का दंश बच्चों पर सदा मंडराता रहा है। जिसे दूर करने के लिए राज्य सरकार ने महिला एवं बाल विकास विभाग को सम्मिलित कर आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं सहित नौनिहालों के लिए पोषाहार सहित अन्य सामग्रियों का वितरण किया जाता रहा है। जिस पर लाखों करोड़ों खर्च भी किए जा रहे हैं, लेकिन दिए जाना वाला यह पोषाहार इतना दोयम दर्जे का होता है कि उन्हें गर्भवती महिलाएं क्या बच्चे तक खाने से परहेज करते हैं। कई बार तो पोषाहार को लेकर शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं और लोगों ने इसे लेने से भी परहेज किया। ऐसी स्थिति में देखा जाए तो कैसे गर्भवती महिलाओं को तंदरुस्त और बच्चों से कुपोषण के दंश का खत्म किया जा सकता है।
पिछले तीन सालों में आई गिरावट
पिछले तीन सालों की बात करें तो जिले में कुपोषण की तस्वीर भयाभय रही है, लेकिन साल दर साल अब इसके आंकड़ों में गिरावट जरूर देखने को मिली है, जो राहत की बात है। 2023 में जिले भर 7299 बच्चे कुपोषण से ग्रसित थे, तो 696 बच्चे अति कुपोषण से जूझ रहे थे, यानी 7995 बच्चे कुपोषण का शिकार थे। लेकिन 2024 में कुपोषण के इन आंकड़ों में 2201 की अच्छी खासी गिरावट देखी गई थी। इस साल अति कुपोषण के जूझ रहे बच्चों की संख्या 584 तो कुपोषण का शिकार बच्चों की संख्या 5210 तक आ गिरी, जो कि जिम्मेदारों के लिए राहत की बात रही। 2025 में भी कुपोषण के आंकड़े में गिरावट जारी रही। इस साल कुपोषण के आंकड़े 2081 तक गिरकर 3713 पर आ गए। जिनमें अति कुपोषण से ग्रसित बच्चों की संख्या 554 रही तो कुपोषित बच्चों का आंकड़ा 3159 दर्ज किया गया।
बाल वर्धन प्रोजेक्ट की शुरुआत
वेदांता गु्रप के सहयोग से बाल वर्धन प्रोजेक्ट भी प्रारंभ किया गया है। जिसमें बच्चों के लिए न्यूट्रिशन से भरपूर न्यूट्रीबार टॉफी का वितरण बच्चों को किया जाएगा। जिले में मई माह की शुरुआत से बच्चों को टॉफी का वितरण होने भी लगा है। यह टॉफी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर प्रत्येक बच्चों को सप्ताह में तीन पर दी जाती है। जानकारी के अनुसार गु्रप ने इस टॉफी को अपने स्तर से तैयार कराया है। जिसमें नौनिहालों के लिए पर्याप्त प्रोटीन्स और न्यूट्रीशन को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
यह कारण कुपोषण का
देखा जाए तो कुपोषण का आधार अशिक्षा, स्तनपान से जुड़ी गलत आदतें, गर्भावस्था में उचित पोषण की कमी और संतुलित आहार का अभाव और जागरुकता का अभाव है। जिस कारण ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में अधिकतर बच्चे कुपोषण का शिकार होते हैं। इन कुपोषित बच्चों का आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के वजन की निगरानी की जाती है? गंभीर रूप से कुपोषित सैम बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराकर इलाज और पौष्टिक खुराक दी जाती है।
कुपोषण को रोकने के लिए कई बेहतर प्रयास किए गए हैं। यही कारण है कि इसके आंकड़ों में भी गिरावट देखी गई है। मई माह से बाल वर्धन प्रोजेक्ट की भी शुरुआत की गई है। इसमें बच्चों को सप्ताह में न्यूटिशिन से भरपूर टॉफी का वितरण किया जाना है।
-भूपेश गर्ग, सीडीपीओ महिला एवं बाल विकास विभाग
जिले में कुपोषण
साल संख्या
2023 7299
2024 5210
2025 3159-----------
अति कुपोषण
साल संख्या2023 696
2024 584
2025 554